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TMC में ममता का बड़ा एक्शन, अभिषेक बनर्जी की ताकत पर लगाम

राजनीति | मोबनी मजूमदार | कोलकाता | ABC NATIONAL NEWS | 7 जून 2026

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी असंतोष के बीच पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। इस बदलाव को पार्टी में बढ़ती बगावत को नियंत्रित करने और नेतृत्व पर उठ रहे सवालों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी से जुड़ा है। अब तक संगठन में बेहद प्रभावशाली माने जाने वाले अभिषेक के साथ सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन को भी राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव नियुक्त किया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से संगठनात्मक निर्णयों में शक्ति का विकेंद्रीकरण होगा और अभिषेक की भूमिका पहले की तुलना में सीमित हो सकती है।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर असंतोष का बड़ा कारण अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली को माना जा रहा था। विधानसभा चुनाव में हार के बाद कई नेताओं ने खुलकर नाराजगी जताई थी। हाल के दिनों में विधायक रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा समेत कई नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाई, जिससे यह असंतोष खुले विद्रोह का रूप लेने लगा।

इसी पृष्ठभूमि में ममता बनर्जी ने संगठन में व्यापक बदलाव करते हुए वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य को पश्चिम बंगाल प्रदेश तृणमूल कांग्रेस का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं सुभ्रत बक्शी को राष्ट्रीय कार्यसमिति में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।

पार्टी के विभिन्न मोर्चों और इकाइयों में भी नए चेहरों को जगह दी गई है। सजदा अहमद, ममता ठाकुर, नयना बंद्योपाध्याय और स्वाति खांडेकर को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि सांसद सायोनी घोष को युवा तृणमूल कांग्रेस की कमान बरकरार रखी गई है।

इस बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक कुणाल घोष ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे दबाव में आकर पार्टी छोड़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस का जमीनी कार्यकर्ता आज भी ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़ा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी का यह संगठनात्मक पुनर्गठन केवल पदों का फेरबदल नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी को शांत करने और 2029 की राजनीतिक लड़ाई के लिए संगठन को फिर से मजबूत करने की रणनीति है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह कदम TMC में जारी बगावत को रोक पाता है या नहीं।

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