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ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा मोड़: शबाना महमूद बन सकती हैं पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री, PM स्टार्मर की कुर्सी पर संकट

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एबीसी नेशनल न्यूज | लंदन | 10 फरवरी 2026

लंदन। ब्रिटेन की राजनीति इस वक्त जिस असाधारण उथल-पुथल से गुजर रही है, उसने सत्ता के शीर्ष से लेकर आम नागरिक तक को गहरे असमंजस में डाल दिया है। कुख्यात एपस्टीन फाइल्स से जुड़े खुलासों ने प्रधानमंत्री Keir Starmer की नैतिक साख और राजनीतिक नेतृत्व—दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। विपक्ष जहां तीखे हमलों के साथ जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के भीतर भी असंतोष की आवाजें खुलकर सामने आने लगी हैं। संसद के गलियारों, मीडिया स्टूडियो और राजनीतिक विश्लेषणों में अब एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या स्टार्मर इस संकट से उबर पाएंगे या ब्रिटेन नेतृत्व परिवर्तन की दहलीज पर खड़ा है? इसी अनिश्चितता के माहौल में लेबर पार्टी की वरिष्ठ नेता Shabana Mahmood का नाम तेजी से उभरकर सामने आया है, जिन्हें संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है।

शबाना महमूद का राजनीतिक सफर आधुनिक ब्रिटेन की बहुसांस्कृतिक पहचान की एक सशक्त मिसाल माना जाता है। कश्मीर मूल के परिवार से संबंध रखने वाली शबाना का जन्म और पालन-पोषण ब्रिटेन में ही हुआ, लेकिन उन्होंने अपनी पारिवारिक विरासत और ब्रिटिश लोकतांत्रिक मूल्यों—दोनों को आत्मसात करते हुए राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। कानून की पढ़ाई के बाद उन्होंने जिस गंभीरता, तैयारी और वैचारिक स्पष्टता के साथ सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया, उसने उन्हें पार्टी के भीतर एक मजबूत और भरोसेमंद चेहरा बना दिया। संसद में वे केवल अल्पसंख्यकों या मानवाधिकारों की आवाज तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि न्यायिक सुधार, सामाजिक समानता, कानून-व्यवस्था और संस्थागत पारदर्शिता जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर भी संतुलित और तथ्यपूर्ण हस्तक्षेप के लिए जानी जाती हैं। यही वजह है कि उन्हें पहचान की राजनीति से ऊपर उठकर एक परिपक्व राष्ट्रीय नेता के रूप में देखा जा रहा है।

इस पूरे राजनीतिक भूचाल की जड़ में Jeffrey Epstein से जुड़ी फाइलों का विवाद है, जिसने ब्रिटिश सत्ता प्रतिष्ठान को असहज कर दिया है। इन फाइलों में वैश्विक स्तर की प्रभावशाली हस्तियों के नाम आने के दावों ने नैतिकता और पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। भले ही प्रधानमंत्री स्टार्मर पर सीधे आरोप न लगाए गए हों, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर उनकी चुप्पी और राजनीतिक रुख कई सवाल खड़े करता है। संसद के भीतर तीखी बहस, मीडिया में लगातार विश्लेषण और सोशल मीडिया पर बढ़ता जनदबाव—इन सबने प्रधानमंत्री की कुर्सी को डगमगा दिया है। लेबर पार्टी के अंदर भी यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या मौजूदा नेतृत्व पार्टी और देश को इस संकट से सुरक्षित बाहर निकाल पाएगा या अब नए नेतृत्व की जरूरत है।

ऐसे माहौल में शबाना महमूद की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि वे संकट के समय भरोसा जगाने वाली, संतुलित और भविष्य की ओर देखने वाली नेता साबित हो सकती हैं। यदि वे प्रधानमंत्री बनती हैं, तो यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि ब्रिटेन के सामाजिक-राजनीतिक इतिहास में एक निर्णायक क्षण के रूप में दर्ज होगा—जहां नेतृत्व का रास्ता धर्म, पृष्ठभूमि या पहचान से नहीं, बल्कि योग्यता, विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों से तय होता है। फिलहाल राजनीतिक घटनाक्रम तेज गति से बदल रहे हैं और आने वाले दिन यह तय करेंगे कि प्रधानमंत्री स्टार्मर अपनी कुर्सी बचा पाते हैं या ब्रिटेन एक नए, ऐतिहासिक अध्याय की ओर कदम बढ़ाता है।

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