जनवरी 2025 का महीना तेलंगाना के लिए बहुआयामी नीति-निर्माण, प्रशासनिक सक्रियता और सामाजिक-आर्थिक हस्तक्षेपों का प्रतीक रहा। राज्य सरकार ने इस दौरान अनेक प्रमुख क्षेत्रों — जैसे कृषि समर्थन, रोजगार सृजन, वाहन नीति में बदलाव, और भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम — में ऐसे निर्णय लिए, जो न केवल राज्य की आर्थिक सुदृढ़ता को आकार देंगे, बल्कि उसकी प्रशासनिक पारदर्शिता और लोक कल्याण की प्रतिबद्धता को भी पुनर्स्थापित करेंगे।
सबसे पहले, राज्य सरकार ने कृषि सहायता और किसान सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी। जनवरी के पहले सप्ताह में मुख्यमंत्री ने “रायथु सुरक्षा निधि” की पुनर्संरचना की घोषणा की, जिसमें राज्य के लघु एवं सीमांत किसानों को ₹10,000 तक की वार्षिक सीधी नकद सहायता देने की योजना तय की गई। इसके साथ ही ‘ई-कृषि क्रेडिट कार्ड’ (e-KCC) प्रणाली की शुरुआत की गई, जिससे किसान बैंकिंग और ऋण सेवाओं का लाभ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सीधे उठा सकेंगे। सिंचाई के लिए ऊर्जा सब्सिडी को बनाए रखते हुए, सरकार ने घोषणा की कि 1 फरवरी से ‘स्मार्ट पंपसेट मीटरिंग’ की पायलट परियोजना की शुरुआत की जाएगी, ताकि वितरण हानि और फर्जी बिलिंग को रोका जा सके। इन पहलों ने न केवल कृषि क्षेत्र की आधारभूत आवश्यकताओं को संबोधित किया, बल्कि जल और ऊर्जा प्रबंधन को भी प्राथमिकता पर रखा।
दूसरा प्रमुख क्षेत्र रहा रोजगार सृजन और कौशल विकास। जनवरी के मध्य में राज्य सरकार ने “तेलंगाना स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट मिशन 2025” (TSEM) के तहत नए इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग हब्स की स्थापना की योजना की घोषणा की। इसके तहत हैदराबाद, वारंगल, महबूबनगर और करीमनगर में “ड्यूल स्किलिंग जोन” विकसित किए जा रहे हैं, जहां युवाओं को आईटी, ऑटोमोटिव, फार्मा और हरित प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों में उद्योग-प्रासंगिक प्रशिक्षण मिलेगा। अनुमान है कि 2025–26 तक इन केंद्रों के माध्यम से 2.5 लाख युवाओं को कौशल प्रदान किया जा सकेगा। इसके साथ ही, निजी क्षेत्र के 11 संस्थानों के साथ PPP मॉडल में समझौते हुए, जिससे लाइव इंटर्नशिप, ऑन-साइट ट्रेनिंग और जॉब मैचिंग की सुविधा राज्य के युवाओं को आसानी से मिलेगी।
तीसरा प्रमुख कदम था वाहन नीति में व्यापक परिवर्तन। 22 जनवरी को परिवहन विभाग ने एक अधिसूचना जारी कर बताया कि तेलंगाना सरकार ने पुराने डीज़ल और पेट्रोल वाहनों के रजिस्ट्रेशन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की नीति बना ली है। इसके तहत 2005 से पहले पंजीकृत भारी वाणिज्यिक वाहनों को मार्च 2025 तक सड़कों से हटाने का निर्देश जारी किया गया। इसके अतिरिक्त, सरकार ने घोषणा की कि इलेक्ट्रिक वाहनों को पंजीकरण शुल्क, रोड टैक्स और परमिट चार्ज से मुक्त किया जाएगा, जो ‘ग्रीन मोबिलिटी’ को बढ़ावा देने का एक स्पष्ट संकेत है। इस नीति के तहत हैदराबाद में छह नए ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन शुरू किए गए, जबकि अगले छह महीनों में पूरे राज्य में 100 और स्टेशनों का निर्माण प्रस्तावित है।
चौथा और सबसे साहसिक कदम रहा भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों का नया दौर। 27 जनवरी को राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (ACB) ने तीन तहसीलदारों और दो इंजीनियरों के खिलाफ बड़ी छापेमारी कर ₹3.2 करोड़ की बेहिसाबी संपत्ति जब्त की। इस अभियान को राज्य सरकार के नए “जन विश्वास अभियान” से जोड़ा गया है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक जिले में विशेष शिकायत निवारण शिविरों का आयोजन किया गया, जहां नागरिक सीधे उच्चाधिकारियों को भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। इस पहल ने जनता के बीच शासन के प्रति विश्वास को बढ़ाया और प्रशासनिक जवाबदेही की भावना को मज़बूत किया।
इन समस्त नीतिगत और प्रशासनिक पहलों के बीच तेलंगाना ने दावोस में WEF 2025 के दौरान भी अपनी आर्थिक रणनीति को वैश्विक मंच पर रखा। राज्य ने स्वास्थ्य टेक्नोलॉजी, फार्मा, और AI-आधारित सार्वजनिक सेवाओं में निवेश की संभावनाओं को उजागर किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के साथ कई प्रारंभिक वार्ताएं सफलतापूर्वक संपन्न हुईं। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य घरेलू नीति में जमीनी क्रियान्वयन के साथ-साथ वैश्विक निवेश के लिए एक प्रतिस्पर्धी वातावरण भी तैयार कर रहा है।
निष्कर्षतः, जनवरी 2025 में तेलंगाना ने केवल योजनाओं की घोषणा भर नहीं की, बल्कि अनेक क्षेत्रों में ठोस क्रियावयन की दिशा में भी कदम उठाए। इन प्रयासों ने राज्य को एक ऐसी नीति-प्रयोगशाला के रूप में स्थापित किया है जो पारदर्शिता, तकनीकी दक्षता और सामाजिक समावेशिता को समवेत रूप में आगे ले जा रही है। अगर यही गति और दिशा बनी रही, तो तेलंगाना अगले पांच वर्षों में भारत के सबसे प्रभावी और स्मार्ट प्रशासन वाले राज्यों में गिना जाएगा।




