एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 11 मार्च 2026
देश में बढ़ते एलपीजी संकट को लेकर सियासत तेज हो गई है। Indian National Congress की महिला इकाई Mahila Congress ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि एलपीजी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और गैस आपूर्ति में कमी ने आम लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है। संगठन का कहना है कि देश के कई हिस्सों में गैस की उपलब्धता प्रभावित होने से घरेलू रसोई से लेकर होटल और छोटे खाद्य कारोबार तक गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं।
महिला कांग्रेस की अध्यक्ष Alka Lamba के नेतृत्व में बुधवार को नई दिल्ली में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि एलपीजी की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति संकट से आम परिवारों, खासकर महिलाओं की परेशानियां बढ़ गई हैं, लेकिन सरकार इस समस्या के समाधान के बजाय विरोध की आवाज उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।
प्रदर्शन के दौरान महिला कांग्रेस नेताओं ने कहा कि Narendra Modi के नेतृत्व वाली सरकार में गैस सिलेंडर की कीमतें लगातार बढ़ी हैं और अब कई शहरों में गैस की उपलब्धता भी प्रभावित हो रही है। उनका आरोप है कि कई जगह लोगों को खाली सिलेंडर लेकर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है और होटल, ढाबे तथा छोटे कारोबार गैस संकट की वजह से प्रभावित हो रहे हैं।
महिला कांग्रेस का कहना है कि जब संगठन ने एलपीजी संकट को लेकर सरकार से जवाब मांगा और विरोध प्रदर्शन किया, तो प्रशासन ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी। संगठन ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए कहा कि सरकार आलोचना से घबराकर विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।
अलका लांबा ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि महंगाई और गैस संकट का सबसे ज्यादा असर देश की महिलाओं और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाएं घर की रसोई संभालती हैं और जब गैस महंगी होती है या उपलब्ध नहीं होती, तो सबसे ज्यादा मुश्किल उन्हें ही झेलनी पड़ती है।
प्रदर्शन के दौरान महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार से एलपीजी की कीमतों में राहत देने, गैस आपूर्ति को तुरंत सामान्य करने और प्रदर्शन के बाद दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने की मांग की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई और एलपीजी जैसे रोजमर्रा के मुद्दे आने वाले समय में राजनीतिक बहस के केंद्र में रह सकते हैं, क्योंकि इनका सीधा असर आम नागरिकों के जीवन पर पड़ता है। फिलहाल इस मुद्दे को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।





