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पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा के पोते रेवन्ना को उम्रकैद

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बेंगलुरु, कर्नाटक | 2 अगस्त 2025 

कर्नाटक की राजनीति को हिला देने वाले बहुचर्चित सेक्स स्कैंडल मामले में आज शनिवार को बड़ा न्यायिक फैसला आया। बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने पूर्व सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवन्ना को एक 47 वर्षीय घरेलू महिला कर्मचारी के साथ बलात्कार का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने उन पर ₹10 लाख का जुर्माना भी लगाया है, जिसमें से ₹7 लाख पीड़िता को मुआवज़े के रूप में दिए जाएंगे।

अदालत ने शुक्रवार को रेवन्ना को बलात्कार, यौन उत्पीड़न, अश्लीलता, सबूत मिटाने और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत दोषी ठहराया था। यह फैसला रेवन्ना की गिरफ्तारी के लगभग 14 महीने बाद और मुकदमे की सुनवाई शुरू होने के आठ हफ्ते के भीतर आया, जिसे न्यायपालिका की तेज कार्यवाही के रूप में देखा जा रहा है।

यह मामला अप्रैल 2024 में तब सामने आया था जब पीड़िता को मैसूर के पास एक फार्महाउस से छुड़ाया गया और उसने पुलिस में रेवन्ना और उनके परिवार पर अपहरण और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि रेवन्ना के परिवार ने उसे धमकाने और मुकदमा वापस लेने के लिए अगवा करवाया था। इस मामले की जांच 40 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) ने की, जिसने 1800 पृष्ठों की 5 वॉल्यूम में रिपोर्ट सौंपी, जिसमें 26 गवाहों से पूछताछ और 180 दस्तावेज़ों की जांच शामिल रही।

रेवन्ना, जो तीन बार के सांसद रह चुके हैं, इस मामले में दोषी पाए गए हैं लेकिन अभी भी इसी जांच से जुड़ी तीन और मामलों में मुकदमा सामना कर रहे हैं। इस कांड की जड़ें मई 2024 में सामने आईं थीं, जब सैकड़ों पेन ड्राइव में यौन उत्पीड़न के कथित वीडियो लीक हुए थे, जिससे रेवन्ना की छवि को भारी नुकसान पहुंचा। घटना के बाद वह जर्मनी भाग गए थे, लेकिन चुनावों के बाद भारत लौटते ही 31 मई को बेंगलुरु एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिए गए।

शनिवार को सजा सुनाए जाने से पहले रेवन्ना कोर्ट में रो पड़े और दया की गुहार लगाते हुए न्यूनतम सजा की मांग की, लेकिन विशेष न्यायाधीश संतोष गजानना भट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “यह अपराध केवल एक महिला के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज और लोकतंत्र के उस मूल विश्वास के खिलाफ है, जो अपने जनप्रतिनिधियों पर करता है।”

यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश में महिलाओं की सुरक्षा और यौन अपराधों पर कड़ी कार्रवाई की माँग तेज़ हो रही है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और महिला संगठनों ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह एक “नजीर बनने वाला फैसला” है और इससे सत्ताधारी और प्रभावशाली लोगों को यह संदेश मिलेगा कि न्याय सबके लिए समान है।

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