समी अहमद | पटना 18 नवंबर 2025
परिवारिक कलह ने बढ़ाई सियासी गर्मी, लालू प्रसाद के बयान ने दिया नया मोड़
राजद (RJD) के भीतर पिछले कई दिनों से उभर रही पारिवारिक कलह ने न केवल पार्टी के कार्यकर्ताओं बल्कि बिहार की राजनीति को भी गहराई से प्रभावित किया है। रोहिणी आचार्य और तेज प्रताप यादव के सार्वजनिक बयानों के बाद माहौल और गरमाया, वहीं पार्टी के अंदरूनी विवादों को लेकर विधायकों में भी बेचैनी साफ दिखाई देने लगी। इसी बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने पहली बार खुलकर इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। विधायकों के साथ बैठक में उन्होंने न सिर्फ स्थिति को संभालने की कोशिश की, बल्कि एक ऐसा भरोसा भी दिया जिसने पार्टी में थोड़ी राहत की सांस भर दी। यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी दल लगातार RJD पर दबाव बना रहे हैं कि परिवारिक विवाद पार्टी की दिशा और नेतृत्व को कमजोर कर सकता है।
तेजस्वी यादव हुए भावुक, विधायकों के सामने छलका मन का दर्द
बैठक के दौरान तेजस्वी यादव स्पष्ट रूप से भावुक नज़र आए। उन्होंने कहा कि उनका पूरा ध्यान बिहार की जनता, कार्यकर्ताओं और पार्टी की मजबूती पर था, लेकिन हालिया पारिवारिक विवादों से वह भी आहत हुए हैं। तेजस्वी के बोलते समय मौजूद विधायकों ने भी माना कि इतनी बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी निभाते हुए ऐसे निजी विवाद उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित करते हैं। तेजस्वी ने साफ किया कि वे किसी भी तरह की बयानबाज़ी में शामिल नहीं हैं और उनकी प्राथमिकता सिर्फ जनता और संगठन है। उनका यह भावुक बयान न सिर्फ विधायकों को छू गया बल्कि पार्टी की एकता को फिर से केंद्र में ले आया।
लालू यादव ने विधायकों को दिया भरोसा: “परिवार मेरा है, पार्टी आप सबकी—समस्या का हल मैं निकाल दूँगा”
जब विवादों और बयानों के तूफ़ान में बैठक का माहौल भारी दिख रहा था, तभी लालू यादव ने अपनी शांत लेकिन प्रभावशाली शैली में सबको संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “परिवार की समस्या परिवार के भीतर ही सुलझती है। आप लोग चिंता न करें, पार्टी को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होने दूँगा।” लालू की यह टिप्पणी उस राजनीतिक संदेश की तरह थी जिसने विधायकों को आश्वस्त किया कि RJD अभी भी उनके अनुभवी नेतृत्व के हाथों में सुरक्षित है। उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष और मीडिया इस मुद्दे को बेवजह बढ़ा-चढ़ाकर दिखा रहे हैं, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। लालू की यह बात पार्टी के अंदर एक मनोवैज्ञानिक स्थिरता लाने वाली साबित हुई, और विधायकों में एक ऊर्जा पैदा हुई कि पार्टी की कमान अभी भी मजबूत हाथों में है।
विधायकों की चिंता—क्या पारिवारिक विवाद पार्टी की चुनावी तैयारी पर असर डालेगा?
बैठक में कई विधायकों ने यह चिंता भी जताई कि लगातार सार्वजनिक विवादों से पार्टी की छवि कमजोर हो सकती है और विरोधी दल इसका फायदा उठा सकते हैं। बिहार की राजनीति में छवि और धारणा की लड़ाई बहुत अहम होती है, और RJD हमेशा से ही अपने आंतरिक अनुशासन और संगठनात्मक एकता के लिए जानी जाती रही है। ऐसे में परिवार के भीतर की तकरार एक संवेदनशील मुद्दा बन गई है। विधायकों का कहना था कि पार्टी को आगे की रणनीति पर ध्यान देना चाहिए और इन विवादों को तत्काल रोकना चाहिए। लालू प्रसाद ने इस पर भी सहमति जताई और भरोसा दिलाया कि वह जल्द ही परिवार के भीतर की सभी गलतफहमियों को समाप्त कर देंगे।
संदेश साफ: RJD में नेतृत्व एकजुट, विवाद जल्द सुलझने की उम्मीद
पूरे घटनाक्रम को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लालू प्रसाद का सीधा हस्तक्षेप और तेजस्वी का भावुक बयान यह संकेत देता है कि पार्टी किसी भी प्रकार की टूट-फूट से बचना चाहती है। RJD जानती है कि आने वाले चुनाव उसकी राजनीतिक नियति तय करेंगे, और इस समय नेतृत्व का एकजुट होना बेहद अहम है। लालू प्रसाद यादव ने जिस तरह से स्थिति को संभाला, उससे स्पष्ट है कि वे अभी भी पार्टी के अंतिम निर्णायक और संतुलनकारी शक्ति बने हुए हैं। पार्टी के भीतर यह संदेश गहराई से उतारा गया है कि RJD की मजबूती परिवार की एकता से ही आती है, और आने वाले दिनों में इस कलह के शांत होने की पूरी संभावना है।




