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‘कांतारा चैप्टर 1’ रिव्यू: लोककथा और भव्यता का अनूठा संगम

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मुंबई 3 अक्टूबर 2025

रिषभ शेट्टी की बहुप्रतीक्षित फिल्म कांतारा चैप्टर 1 आखिरकार दर्शकों के सामने आ चुकी है। यह फिल्म 2022 की ब्लॉकबस्टर कांतारा का प्रीक्वल है और अपने पहले ही दिन से दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। फिल्म की कहानी हमें प्राचीन कर्नाटक के उस दौर में ले जाती है जहां लोककथाओं, रहस्यमयी परंपराओं और प्रकृति की पूजा का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। यह फिल्म भूता कोला की लोकपरंपरा, धर्म और शक्ति संघर्ष को केंद्र में रखकर आगे बढ़ती है, जिससे दर्शक न केवल कहानी से जुड़े रहते हैं बल्कि उस समय की संस्कृति और जीवनशैली से भी आत्मीय रूप से जुड़ जाते हैं।

फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका निर्देशन और दृश्य-श्रव्य प्रस्तुति है। रिषभ शेट्टी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वे केवल अभिनेता ही नहीं बल्कि एक सशक्त निर्देशक भी हैं। अरविंद एस. कश्यप की सिनेमैटोग्राफी ने प्राकृतिक दृश्यों, जंगलों और युद्ध के पलों को इतनी खूबसूरती से कैद किया है कि हर फ्रेम एक चित्रकला जैसा लगता है। वहीं अजनीश लोकनाथ का संगीत फिल्म को गहराई और आत्मीयता प्रदान करता है। खासकर क्लाइमैक्स के दौरान संगीत और ध्वनि प्रभाव जिस तरह से दृश्य को ऊँचाई देते हैं, वह दर्शकों के मन में लंबे समय तक गूंजता रहता है।

अभिनय के मोर्चे पर भी फिल्म दमदार साबित होती है। रिषभ शेट्टी ने मुख्य भूमिका में अपने किरदार को न केवल निभाया है बल्कि उसमें पूरी तरह ढल गए हैं। उनका अभिनय चरित्र को जीवंत कर देता है और दर्शकों को उस यात्रा का हिस्सा बना देता है। रुक्मिणी वसंत ने महिला प्रधान भूमिका को गंभीरता और गहराई के साथ निभाया है, जो फिल्म के भावनात्मक पक्ष को और मजबूत करती है। गुलशन देवैया प्रतिद्वंद्वी के रूप में दमदार उपस्थिति दर्ज कराते हैं और अपने किरदार के माध्यम से कहानी में संघर्ष और तनाव की परतें जोड़ते हैं। वहीं, जयाराम का अभिनय फिल्म में गंभीरता और परिपक्वता का एहसास कराता है। इन सबकी अदाकारी मिलकर फिल्म को और प्रभावशाली बनाती है।

हालांकि फिल्म में कुछ कमजोरियां भी हैं। पहला हिस्सा अपेक्षाकृत धीमा है और कहानी को पकड़ने में दर्शकों को थोड़ा धैर्य रखना पड़ता है। कई बार कथा में इतने सारे तत्व जोड़ दिए जाते हैं कि वह भारीभरकम और जटिल लगने लगती है। कुछ हिस्सों में हास्य और हल्के-फुल्के संवाद संदर्भ से बाहर प्रतीत होते हैं, जिससे मूड थोड़ा टूटता है। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, खासकर फिल्म का दूसरा हिस्सा और क्लाइमैक्स, यह सारी खामियां पीछे छूट जाती हैं। क्लाइमैक्स इतना प्रभावशाली और शक्तिशाली है कि दर्शक थिएटर से निकलने के बाद भी लंबे समय तक उसके असर से बाहर नहीं आ पाते।

कुल मिलाकर कांतारा चैप्टर 1 केवल एक फिल्म नहीं बल्कि एक अनुभव है। यह अनुभव दर्शकों को पौराणिक कथाओं, रहस्यमयी परंपराओं और प्रकृति की शक्ति से जोड़ देता है। यह फिल्म भारतीय सिनेमा में उस धारा का प्रतिनिधित्व करती है जो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि संस्कृति और परंपरा की गहराई को भी परदे पर जीवंत करती है। भले ही इसमें कुछ कमियां हों, लेकिन फिल्म का पैमाना, इसकी तकनीकी प्रस्तुति और दमदार अभिनय इसे विशेष बनाते हैं। यदि आप लोककथाओं, मिथकों और महाकाव्यात्मक प्रस्तुति को पसंद करते हैं तो कांतारा चैप्टर 1 को जरूर देखना चाहिए।

रेटिंग: (4/5)

 

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