नई दुनिया 17 सितम्बर 2025
कांग्रेस ने ओडिशा में बीजेपी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि राज्य में महिला सुरक्षा अब सिर्फ दिखावटी चुनावी भाषणों तक सीमित रह गई है। पुरी में हाल ही में हुई एक भयावह घटना इसका सबसे भयानक सबूत है। कांग्रेस ने कहा कि यह सिर्फ एक isolated मामला नहीं, बल्कि पूरे राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती अपराध दर का हिस्सा है।
पुरी का टूरिस्ट स्पॉट बना हादसे का गवाह
पुरी जिले में एक कपल टूरिस्ट स्पॉट पर घूमने गया। कांग्रेस के आरोपों के मुताबिक, बदमाशों ने पहले महिला की बिना इजाजत फोटो खींची और फिर उसके साथ छेड़खानी शुरू कर दी। जब कपल ने इसका विरोध किया, तो युवक को बंधक बना लिया गया और महिला का गैंगरेप किया गया। यह घटना साबित करती है कि ओडिशा में अपराधी अब बेखौफ हैं और कानून की कोई ताकत उनके खिलाफ काम नहीं कर रही।
महिलाओं के खिलाफ अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे
ओडिशा में हाल ही में सिर्फ पुरी ही नहीं बल्कि राज्य के अन्य हिस्सों में भी महिलाओं के खिलाफ भयावह अपराध हो रहे हैं। कुछ दिनों पहले पुरी में ही तीन लोगों ने एक नाबालिग बच्ची का अपहरण कर उसे जिंदा जला दिया था। वहीं, बालासोर में एक 20 साल की छात्रा ने अपने HOD द्वारा यौन उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्या कर ली।
कांग्रेस के मुताबिक, राज्य में हर दिन लगभग 15 बलात्कार होते हैं और 40,000 से अधिक महिलाएं लापता हैं। इसके बावजूद बीजेपी सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही।
दुष्कर्म और उत्पीड़न के खिलाफ आवाज़ दबाई जा रही
कांग्रेस ने कहा कि ओडिशा में महिलाएं अपराध के खिलाफ अपनी आवाज उठाने पर भी सुरक्षित नहीं हैं। पुलिस और प्रशासन उनके लिए मदद का माध्यम बनने के बजाय, अक्सर अपराधियों के पक्ष में खड़े हो जाते हैं। महिलाएं डर और उत्पीड़न के साये में जीने को मजबूर हैं।
चुनावी भाषणों से बढ़कर, वास्तविकता भयावह
बीजेपी सरकार महिला सुरक्षा के मुद्दे को सिर्फ चुनावी रैलियों और भाषणों में चमकाने की कोशिश कर रही है। असलियत में स्थिति भयावह है—अपराधी बेखौफ हैं और कानून का डर कहीं नजर नहीं आता। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर महिला सुरक्षा के लिए तत्काल कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो राज्य में स्थिति और ज्यादा विकराल होगी।
जनता का गुस्सा और कांग्रेस की मांग
कांग्रेस ने राज्य सरकार से मांग की है कि महिला सुरक्षा पर विशेष अदालतें, त्वरित न्याय और अपराधियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई हो। अब राज्य की जनता और देश की महिलाएं सवाल पूछ रही हैं—”क्या ओडिशा में महिलाओं का जीवन अब सुरक्षा के बजाय खतरे में है?”




