न्यूयॉर्क, 24 सितंबर 2025
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र की पृष्ठभूमि में एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान Global South देशों को अधिक एकजुटता दिखाने और बहुपक्षवाद (multilateralism) को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने इस अवसर पर विश्व स्तर पर लोकतांत्रिक एवं समावेशी व्यवस्था स्थापित करने हेतु संयुक्त राष्ट्र सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के व्यापक सुधार की भी मांग की।
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि “जब वैश्विक स्तर पर चिंताएँ और खतरों की बहुलता है, तो Global South का मल्टीलेटरल दृष्टिकोण समाधान की दिशा में स्वाभाविक है।” उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक व्यवस्था में बढ़ती चुनौतियों — जैसे कि महामारी, हिंसक संघर्ष, जलवायु परिवर्तन, व्यापार अस्थिरता — को देखते हुए विकासशील देशों को साझा दृष्टिकोण से काम करना चाहिए।
उन्होंने पांच प्रमुख प्रस्ताव रखे, जिनके जरिए Global South की आवाज़ को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इनमें यह सुझाव शामिल थे कि मौजूदा मंचों का उपयोग कर परामर्श बढ़ाना चाहिए, और कि विकासशील देशों को अपनी विशिष्ट क्षमताएँ — जैसे कि टीकों, डिजिटल टेक्नोलॉजी, शिक्षा, कृषि प्रथाएँ, और लघु एवं मध्यम उद्योग (SME) — अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा करने चाहिए।
जयशंकर ने यह भी ज़ोर दिया कि reform (सुधार) केवल संस्थागत नहीं, बल्कि विचारधारात्मक हो — अर्थात्, Global South के हितों को ध्यान में रखते हुए नीतिगत एवं तकनीकी सहयोग को सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि emerging technologies, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) — पर Global South के देशों को पीछे नहीं छोड़ा जाना चाहिए।




