नई दिल्ली 29 अक्टूबर 2025
कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा व्यंग्य किया है। इस बार उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताज़ा बयान का सहारा लेकर मोदी पर निशाना साधा। रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “अब तक उन्होंने यह 54 बार कहा है। उन्होंने यह अमेरिका, क़तर, सऊदी अरब, मिस्र और ब्रिटेन में कहा। उन्होंने यह हवा में उड़ते विमान में भी कहा और ज़मीन पर भी। अब राष्ट्रपति ट्रंप ने जापान में व्यापारिक नेताओं को संबोधित करते हुए इसे फिर दोहराया। कोई आश्चर्य नहीं कि उनका दिल्ली वाला ‘दोस्त’ अब उन्हें गले लगाना नहीं चाहता।”
इस व्यंग्य के जरिए जयराम रमेश ने संकेत दिया कि ट्रंप के हालिया टिप्पणियों या रवैये से मोदी असहज महसूस कर रहे हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय हलकों में नई बहस छिड़ी हुई है — खासकर ट्रंप के “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडे के पुनरुत्थान और भारत की आर्थिक नीतियों पर उनके परोक्ष हमलों को लेकर।
“दोस्ती और दूरी” की राजनीति
जयराम रमेश का यह बयान केवल तंज नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से गहरी टिप्पणी है। उन्होंने मोदी और ट्रंप की पुरानी “हग डिप्लोमेसी” पर चुटकी लेते हुए यह दिखाने की कोशिश की है कि अब वह चमक फीकी पड़ चुकी है। जब ट्रंप राष्ट्रपति थे, तब मोदी और उनके बीच ‘Howdy Modi’ और ‘Namaste Trump’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए दोस्ती का खूब प्रचार हुआ था। लेकिन अब ट्रंप के बदलते राजनीतिक स्वर और बयानबाजी ने इस रिश्ते की गर्मजोशी को ठंडा कर दिया है।
कांग्रेस का रणनीतिक व्यंग्य
कांग्रेस इन दिनों मोदी की विदेश नीति को लेकर लगातार हमलावर है। पार्टी यह दिखाना चाहती है कि मोदी की “ग्लोबल लीडर” की छवि अब कमजोर हो रही है। रमेश के इस पोस्ट में वही रणनीतिक व्यंग्य झलकता है — जिसमें ट्रंप के शब्दों का उपयोग मोदी की छवि पर चोट करने के लिए किया गया है। यह कांग्रेस की सोशल मीडिया रणनीति का हिस्सा भी है, जहां हास्य और व्यंग्य के जरिए राजनीतिक विरोधियों को कठघरे में खड़ा किया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पृष्ठभूमि
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के महीनों में कई देशों के व्यापारिक संबंधों पर टिप्पणी की है, जिसमें भारत भी शामिल है। उनके “India is taking advantage of America” जैसे बयानों ने फिर से विवाद खड़ा किया है। जयराम रमेश ने इन्हीं संदर्भों को जोड़ते हुए मोदी पर निशाना साधा — कि जो कभी ट्रंप के ‘गले लगने वाले’ दोस्त थे, वे अब दूरी बना रहे हैं।
रमेश का यह बयान राजनीतिक व्यंग्य से कहीं अधिक है — यह भारत की विदेश नीति, व्यक्तिगत कूटनीति और नेताओं की आपसी समीकरणों की बदलती बयार को दर्शाता है। कांग्रेस ने एक बार फिर अपने विरोध की भाषा में चुटकी और गहराई दोनों मिलाकर मोदी सरकार की अंतरराष्ट्रीय छवि को चुनौती देने की कोशिश की है।





