चंडीगढ़ से उठी इंसाफ की पुकार
हरियाणा के वरिष्ठ IPS अधिकारी वाई. पूरन कुमार की रहस्यमय मौत के बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवालों का तूफान उठ गया है। इस बीच भीम आर्मी चीफ और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद रावण ने शनिवार को चंडीगढ़ में मृतक अधिकारी के परिवार से मुलाकात कर एक बड़ा बयान दिया। आज़ाद ने कहा कि “पूरन कुमार का निधन किसी व्यक्ति की निजी त्रासदी नहीं, बल्कि एक गहरे संस्थागत षड्यंत्र का परिणाम है।” उन्होंने अपने बयान में यह साफ़ किया कि यह घटना सिस्टम के भीतर की साज़िश और दमन की पराकाष्ठा है, जो एक ईमानदार अधिकारी को चुप कराने के लिए रची गई। उन्होंने कहा कि परिवार और उपलब्ध दस्तावेजों से यह साफ़ साबित होता है कि वाई. पूरन कुमार पर झूठे आरोप थोपे गए, गवाह गढ़े गए और नियमों को ताक पर रखकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। यह कोई सामान्य घटना नहीं बल्कि एक संस्थानिक हत्या (Institutional Murder) है — जहाँ सत्य बोलने वाले को दबाने के लिए पूरा तंत्र सक्रिय रहा।
सुसाइड नोट ने खोली सिस्टम की पोल — ‘मैंने अपने सम्मान की रक्षा की’
चंद्रशेखर आज़ाद ने बताया कि वाई. पूरन कुमार का सुसाइड नोट इस पूरे षड्यंत्र की सच्चाई उजागर करता है। उसमें यह लिखा गया है कि उन्होंने किसी अपराधबोध में नहीं, बल्कि अपने सम्मान और ईमानदारी की रक्षा के लिए बलिदान दिया है। यह एक अधिकारी का नहीं, बल्कि एक सिपाही का अंत था जो आखिरी सांस तक अपने कर्तव्य और सत्य के साथ खड़ा रहा। आज़ाद ने कहा — “पूरन कुमार को एक सच्चा और ईमानदार अधिकारी होने की सज़ा दी गई। जिस व्यक्ति ने प्रशासनिक पारदर्शिता और प्रतिनिधित्व के सवाल उठाए, उसे झूठे मामलों में फंसाकर बदनाम करने की कोशिश की गई। जब सिस्टम न्याय के बजाय साज़िश की भाषा बोलने लगे, तब इंसानियत दम तोड़ देती है — और यही इस मामले में हुआ।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि एक IPS अधिकारी को इस तरह मानसिक दबाव में आत्महत्या करने पर मजबूर किया जा सकता है, तो यह पूरे शासन तंत्र के नैतिक पतन का प्रतीक है।
अमनीत की सहमति के बिना शव का पोस्टमार्टम — संवेदनशीलता पर सवाल
चंद्रशेखर आज़ाद ने इस प्रकरण में सरकारी अमानवीयता का सबसे भयावह पहलू उजागर किया। उन्होंने कहा कि पूरन कुमार की पत्नी अमनीत, जो स्वयं हरियाणा कैडर की वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं, की सहमति के बिना प्रशासन ने शव को जबरदस्ती पोस्टमार्टम के लिए ले जाया। यह न केवल असंवेदनशील, बल्कि कानूनी और नैतिक रूप से निंदनीय कदम है। आज़ाद ने कहा — “अगर एक वरिष्ठ महिला अधिकारी की इच्छा और अधिकार को इस तरह कुचला जा सकता है, तो यह समझना मुश्किल नहीं कि आम नागरिक के साथ कैसा बर्ताव होता होगा। यह कोई जांच प्रक्रिया नहीं, बल्कि सत्ता का भय दिखाने की कोशिश है।” उन्होंने इस अमानवीय व्यवहार को “संविधान और मानवाधिकारों की आत्मा पर आघात” बताया। यह घटना अब प्रशासन की संवेदनशीलता, जवाबदेही और मानव गरिमा पर गहरा प्रश्नचिह्न बन गई है।
‘यह परिवार का दर्द नहीं, सिस्टम की साख का सवाल है’
भीम आर्मी प्रमुख ने स्पष्ट कहा कि यह मामला सिर्फ एक अधिकारी या परिवार का नहीं, बल्कि सिस्टम में सत्य बोलने वाले हर ईमानदार आदमी के सम्मान और सुरक्षा का सवाल है। चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से इस पूरे प्रकरण की त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी न्यायिक जांच की मांग की। उन्होंने कहा — “पूरन कुमार की मौत से यह साबित होता है कि सिस्टम में ईमानदारी अब अपराध बन चुकी है। यह संघर्ष अब सिर्फ न्याय पाने का नहीं, बल्कि उस सड़ चुके ढांचे को चुनौती देने का है जो भ्रष्टाचार को ढाल बनाकर ईमानदारी का गला घोंट देता है।” आज़ाद ने यह भी कहा कि अगर सरकार ने इस मामले की गंभीरता से जांच नहीं की, तो भीम आर्मी इसे राष्ट्रीय आंदोलन में बदल देगी। “पूरन कुमार ने खुद को नहीं मारा — उन्हें सिस्टम ने मारा, और यह न्याय की मांग सिर्फ़ परिवार की नहीं, देश की हर जागरूक आत्मा की है।”
यह मौत नहीं, एक आईना है जिसमें तंत्र का चेहरा दिखता है
वाई. पूरन कुमार की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। यह सिर्फ एक अधिकारी की आत्महत्या नहीं, बल्कि एक जीवित लोकतंत्र की चीख है। चंद्रशेखर आज़ाद का बयान इस घटना को एक बड़े नैतिक विमर्श में बदल देता है — जहाँ सवाल केवल न्याय का नहीं, बल्कि उस तंत्र की आत्मा का है जो न्याय देने के लिए बनाया गया था। उन्होंने कहा — “पूरन कुमार की मौत हमें यह याद दिलाती है कि जब सच्चाई बोलने वाला अकेला पड़ जाता है, तो साज़िश करने वाले मजबूत हो जाते हैं। लेकिन यह संघर्ष रुकेगा नहीं — यह न्याय की आग अब हर उस दिल में जलनी चाहिए जो संविधान, ईमानदारी और सम्मान में विश्वास रखता है।”





