एबीसी नेशनल न्यूज | तेहरान/बेरूत/रियाद, 3 मार्च 2026
पश्चिम एशिया में युद्ध की आग अब हर तरफ फैल चुकी है। इज़राइल ने लेबनान की दक्षिणी सीमा पर अपनी सेना को और आगे बढ़ा दिया है, जहां अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया गया है ताकि हिज़्बुल्लाह के संभावित हमलों से इज़राइली नागरिकों और रणनीतिक स्थलों की रक्षा की जा सके। यह कदम हिज़्बुल्लाह के हालिया रॉकेट और ड्रोन हमलों के जवाब में उठाया गया है, जो ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद शुरू हुए बड़े संघर्ष का हिस्सा है। इज़राइली रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मिलकर उन्होंने सेना को अधिक रणनीतिक स्थानों पर कब्जा करने की अनुमति दी है, ताकि इज़राइली सीमा समुदायों पर सीधे हमलों को रोका जा सके। इज़राइली सेना ने पुष्टि की है कि दक्षिणी लेबनान में पहले से कब्जे वाली पांच पोजीशन्स के अलावा अब और गहराई में सैनिक तैनात किए गए हैं, जिसे “फॉरवर्ड डिफेंस” कहा जा रहा है।
लेबनान के दक्षिणी इलाकों में इज़राइली हवाई हमले तेज हो गए हैं, जहां बेरूत के दक्षिणी उपनगरों (दाहिया) और अन्य क्षेत्रों में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया गया है। लेबनानी स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में दर्जनों लोग घायल हुए हैं और कई इमारतें तबाह हो गई हैं। हिज़्बुल्लाह ने जवाबी कार्रवाई में इज़राइल पर ड्रोन और रॉकेट दागे हैं, जिसमें उत्तरी इज़राइल के कुछ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इज़राइली सेना ने इनमें से कई को इंटरसेप्ट कर लिया, लेकिन स्थिति अब और तनावपूर्ण हो गई है। लेबनान में हजारों नागरिक विस्थापित हो चुके हैं, और कई गांवों से निकासी के आदेश जारी किए गए हैं। यह सब 2024 के सीजफायर के बाद पहली बार इतने बड़े पैमाने पर हो रहा है, जहां हिज़्बुल्लाह ने ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत का बदला लेने की घोषणा की है।
दूसरी ओर, इज़राइल और अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई ईरान पर केंद्रित है। तेहरान और उसके आसपास के सैन्य, खुफिया और यहां तक कि राज्य प्रसारक (स्टेट टीवी) जैसे प्रतीकात्मक ठिकानों पर लगातार हवाई हमले हो रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि “बड़ी लहर” अभी बाकी है, और युद्ध कुछ हफ्तों तक चल सकता है, लेकिन इसमें लंबा समय भी लग सकता है। ईरान में मौतों का आंकड़ा 500 से ज्यादा पहुंच चुका है, जिसमें कई कमांडर और नागरिक शामिल हैं। इज़राइल ने नतांज न्यूक्लियर सुविधा पर भी हमले किए हैं, जिससे ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को बड़ा झटका लगा है। ईरान ने जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को “बंद” घोषित कर दिया है, जो वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
इस बीच, ईरान ने पलटवार को और व्यापक बनाया है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में स्थित अमेरिकी दूतावास पर दो ड्रोन हमले हुए, जिससे परिसर में आग लग गई और मामूली नुकसान पहुंचा। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है, जबकि अमेरिकी दूतावास ने रियाद, जेद्दा और धहरान में “शेल्टर-इन-प्लेस” आदेश जारी किया है। यह हमला ईरान के समर्थित मिलिशिया द्वारा अमेरिकी सहयोगी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हो रहे हमलों की श्रृंखला का हिस्सा है। ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी बेस और अन्य लक्ष्यों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव चरम पर पहुंच गया है।
यह संघर्ष अब सिर्फ ईरान-इज़राइल-अमेरिका तक सीमित नहीं रहा। लेबनान, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत जैसे कई देश प्रभावित हैं, और हवाई क्षेत्र बंद होने, तेल कीमतों में उछाल और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ गई है। चीन और अन्य देशों ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, लेकिन फिलहाल कोई कूटनीतिक सफलता नहीं दिख रही। ईरान में अंतरिम लीडरशिप काउंसिल (राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, ज्यूडिशियरी चीफ ग़ोलाम-हुसैन मोहसिनी-एजेई और आयतोल्लाह अलीरेज़ा अराफी) काम कर रही है, और नए सुप्रीम लीडर का चुनाव जल्द होने की उम्मीद है।
वैश्विक समुदाय अब इस बात पर नजर रखे हुए है कि यह युद्ध कितना और विस्तार लेगा। सैन्य कार्रवाई, कूटनीति और मानवीय संकट के बीच मध्य पूर्व की स्थिति बेहद नाजुक है, और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में और बड़े हमलों की आशंका से दुनिया थर्रा रही है।




