तेल अवीव/दोहा, 12 सितंबर 2025
कतर में इज़राइल की हालिया सैन्य कार्रवाई ने पूरे पर्शियन गल्फ (खाड़ी) क्षेत्र की राजनीति को हिला दिया है। इस हमले के बाद न केवल कतर बल्कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और ओमान जैसे देशों के साथ इज़राइल के रिश्तों पर भी गहरा असर पड़ा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, इज़राइल ने दावा किया कि कतर में मौजूद एक गुप्त ठिकाने पर उसने हमला किया, जहां उसके दुश्मन गुट सक्रिय थे। लेकिन इस कार्रवाई को कतर ने अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है। खाड़ी देशों ने भी इसे बेहद गंभीर घटना मानते हुए इज़राइल से स्पष्टीकरण की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब्राहम समझौते के बाद जो रिश्तों में सुधार की उम्मीद जगी थी, उस पर इस घटना से बड़ा झटका लगा है। सऊदी अरब और UAE जैसे देश, जो इज़राइल के साथ धीरे-धीरे रिश्तों को सामान्य कर रहे थे, अब दबाव में हैं कि वे कतर के समर्थन में सामने आएं। इससे खाड़ी क्षेत्र में बने नाजुक संतुलन पर संकट मंडराने लगा है।
कतर पहले से ही हमास और अन्य गुटों के साथ अपने रिश्तों को लेकर चर्चा में रहा है। इज़राइल का यह हमला उसके लिए कूटनीतिक फायदा भी ला सकता है, क्योंकि अब वह खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के अन्य देशों से इज़राइल के खिलाफ एकजुटता की अपील कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह घटना चिंता का विषय बन गई है। अमेरिका, जो खाड़ी देशों और इज़राइल दोनों का रणनीतिक साझेदार है, असहज स्थिति में है। वॉशिंगटन पर दबाव है कि वह इज़राइल पर संयम बरते और क्षेत्रीय स्थिरता को बिगड़ने से रोके।
अगर यह तनाव बढ़ता है तो न केवल इज़राइल-खाड़ी रिश्ते पटरी से उतर सकते हैं, बल्कि ऊर्जा बाज़ार और वैश्विक राजनीति पर भी गहरा असर पड़ सकता है।




