राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | गुरुग्राम/नई दिल्ली | 25 मार्च 2026
गुरुग्राम में 4 साल की मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी ने पूरे देश को झकझोर दिया है। लेकिन इस मामले में पुलिस की सुस्ती और संवेदनहीनता ने सुप्रीम कोर्ट को और भी ज्यादा नाराज़ कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़े शब्दों में पूछा—“क्या पुलिस राजा है, जो पीड़ित के घर भी नहीं जा सकती?”
दरअसल, अदालत के सामने यह बात आई कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद पुलिस पीड़ित परिवार तक समय पर नहीं पहुंची। इस लापरवाही को बेहद गंभीर मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस को शो-कॉज नोटिस जारी किया और पूछा कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने का आदेश दिया है। अदालत ने साफ किया कि इस तरह के मामलों में न केवल तेज जांच जरूरी है, बल्कि पीड़ित परिवार के साथ संवेदनशील व्यवहार भी उतना ही अहम है।
सुनवाई के दौरान जजों का गुस्सा साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा कि जब एक 4 साल की बच्ची के साथ इतना बड़ा अपराध होता है, तो पुलिस का पहला कर्तव्य है कि वह तुरंत मौके पर पहुंचे, परिवार को सुरक्षा दे और दोषियों को पकड़ने में पूरी ताकत झोंक दे।
यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी—चाहे वह अपराधी हो या कानून लागू करने वाली एजेंसी।
देशभर में इस घटना को लेकर गुस्सा है और हर कोई यही मांग कर रहा है कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले, ताकि समाज में एक मजबूत संदेश जाए कि मासूमों के खिलाफ अपराध करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
इस मामले ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कानून तो सख्त हैं, लेकिन उनका सही और समय पर पालन ही असली न्याय दिला सकता है। अब निगाहें SIT की जांच और अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हैं—उम्मीद यही है कि इस बार न्याय न सिर्फ होगा, बल्कि दिखाई भी देगा।




