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केसी त्यागी जदयू में हैं या नहीं? राजीव रंजन का बड़ा बयान, नीतीश के लिए भारत रत्न की मांग से भी किनारा

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शमी मोहम्मद | पटना 10 जनवरी 2026

जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में एक बार फिर अंदरूनी असहजता खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे केसी त्यागी द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग के बाद जदयू ने खुद को इस मुद्दे से अलग कर लिया है। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने साफ शब्दों में कहा है कि यह मांग पार्टी की आधिकारिक राय नहीं है और इसे जदयू के स्टैंड के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। राजीव रंजन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि केसी त्यागी का यह बयान पूरी तरह उनकी निजी सोच है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि पार्टी के भीतर भी अब यह स्पष्ट नहीं है कि केसी त्यागी इस समय जदयू में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं या नहीं। उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि यह पहली बार है जब पार्टी की ओर से इतनी साफ़ तौर पर केसी त्यागी की स्थिति पर सवाल उठाया गया है।

जदयू प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले ऐसे संवेदनशील मुद्दों को उठाना पार्टी को ठीक नहीं लगता। उनका कहना था कि नीतीश कुमार के योगदान और उनके लंबे राजनीतिक सफर का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन भारत रत्न जैसे सम्मान को चुनावी माहौल से जोड़ना गलत संदेश दे सकता है। जदयू फिलहाल किसी भी तरह के विवाद या अनावश्यक बहस से दूरी बनाए रखना चाहती है।

गौरतलब है कि केसी त्यागी कभी जदयू के प्रमुख रणनीतिकारों में गिने जाते थे और वे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रह चुके हैं। लेकिन बीते कुछ समय से उनकी भूमिका लगातार सीमित होती चली गई। संगठनात्मक बैठकों, बड़े फैसलों और आधिकारिक बयानों में उनका नाम अब पहले जैसा नहीं दिखता। राजीव रंजन के ताज़ा बयान के बाद यह चर्चा और तेज़ हो गई है कि केसी त्यागी अब जदयू की मुख्यधारा से लगभग बाहर हो चुके हैं।

साफ संदेश क्या है?

राजीव रंजन के बयान से जदयू की लाइन बिल्कुल साफ़ नजर आती है—

1. नीतीश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग जदयू की आधिकारिक मांग नहीं है।

2. केसी त्यागी के बयान से पार्टी ने खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है।

3. राज्यसभा चुनाव से पहले जदयू किसी नए राजनीतिक विवाद में नहीं उलझना चाहती।

घटनाक्रम ने जदयू में नेतृत्व, अनुशासन और पार्टी लाइन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या आने वाले दिनों में पार्टी केसी त्यागी को लेकर कोई औपचारिक फैसला लेती है या यह दूरी यूं ही बनी रहती है।

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