एबीसी नेशनल न्यूज | तेहरान/यरुशलम | 15 मार्च 2026
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर मौत का फतवा जारी कर दिया है। IRGC के आधिकारिक बयान में साफ शब्दों में कहा गया है—”अगर ये बच्चे-कातिल अपराधी अभी जिंदा है, तो हम उसे पूरी ताकत से पीछा करेंगे और मार डालेंगे, उसकी सांसें थमने तक पीछा नहीं छोड़ेंगे!” ईरानी मीडिया जैसे सेपाह न्यूज, तस्नीम, फार्स और आईआरएनए ने इस बयान को प्रमुखता से छापा है, जहां नेतन्याहू को “चाइल्ड-किलिंग क्रिमिनल” यानी बच्चों का कातिल और “ज़ायोनी अपराधी” करार दिया गया है। IRGC का दावा है कि क्षेत्र में हो रही हर तबाही, हर मासूम बच्चे की मौत, हर परिवार की चीख और नागरिकों के कत्लेआम के लिए यही शख्स जिम्मेदार है, और अब उसकी जान की कीमत चुकानी पड़ेगी—चाहे वह कितने भी गहरे अमेरिकी – इजरायली बंकर में छिप जाए।
यह धमकी युद्ध के 16वें दिन आई है, जब सोशल मीडिया पर अफवाहों का तूफान मचा हुआ था कि नेतन्याहू की मौत हो चुकी है या वह गायब हो गए हैं। कुछ रिपोर्ट्स और वीडियो में दावा किया गया कि IRGC ने उनके ऑफिस या संभावित ठिकानों पर हमला किया, जिससे “AI ग्लिच” जैसी अफवाहें फैलीं कि वह मर चुके हैं। लेकिन इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन सबको सिरे से खारिज कर दिया—”प्रधानमंत्री पूरी तरह सुरक्षित, स्वस्थ और सक्रिय हैं, यह सब फेक न्यूज और प्रोपगैंडा है!” इसके बावजूद IRGC ने बयान में और सख्ती बरती कि अगर वह जिंदा है तो मौत निश्चित है। यह अब सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं—यह युद्ध का सबसे व्यक्तिगत और खतरनाक चेहरा बन चुका है, जहां दोनों तरफ के नेता एक-दूसरे की जान के पीछे पड़े हैं।
युद्ध की ताजा स्थिति और भी भयावह हो गई है। रात भर अमेरिका और इजरायल ने ईरान के इस्फहान प्रांत पर भारी हमले किए—एक फैक्ट्री पर हमले में कम से कम 15 लोग मारे गए, IRGC एयरबेस, स्पेस रिसर्च सेंटर और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरानी सरकार के प्रवक्ता फतेमेह मोहाजेरानी ने दावा किया कि अब तक 42,000 से ज्यादा नागरिक स्थल तबाह हो चुके हैं—घर, स्कूल, अस्पताल सब कुछ। सैकड़ों नागरिक मारे गए, जिनमें 200 से ज्यादा बच्चे शामिल हैं। तेहरान के पश्चिमी हिस्से में स्पेस रिसर्च सेंटर बुरी तरह क्षतिग्रस्त है, पूरा शहर धुएं और आग की लपटों में डूबा हुआ है। इजरायल का कहना है कि 28 फरवरी से अब तक ईरान पर 7,000 से ज्यादा हमले हो चुके हैं, और हजारों टारगेट बाकी हैं—कम से कम तीन हफ्ते और अभियान चलेगा।
जवाब में ईरान ने इजरायल पर नए सिरे से बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए। उत्तरी इजरायल के पोर्ट शहर हाइफा पर खैबर मिसाइलों का दौर चला—आयरन डोम को चकमा देकर कई मिसाइलें गिरीं, जिससे बड़े पैमाने पर आग लग गई, धुआं उठ रहा है, सड़कों पर मलबा और जली हुई गाड़ियां बिखरी पड़ी हैं। तेल अवीव, होलोन, रामला, नेतन्या और अन्य शहरों में सायरन बज रही हैं—पिछले 24 घंटों में 100 से ज्यादा इजरायली घायल हुए, कुछ बुजुर्ग ग्लास के टुकड़ों और धुएं से चोटिल। ईरान का दावा है कि उसने इजरायल के सैन्य ठिकानों, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेंटर और अमेरिकी बेस पर सटीक हमले किए। गल्फ में भी हमले जारी—यूएई, सऊदी, कुवैत और ओमान पर ड्रोन-मिसाइल दागे गए, लेकिन ज्यादातर इंटरसेप्ट हुए। ओमान के सोहर इंडस्ट्रियल जोन में एक ड्रोन गिरने से दो मजदूर मारे गए।
होर्मुज स्ट्रेट पर खतरा मंडरा रहा है—ट्रंप ने गल्फ देशों से अपील की कि स्ट्रेट खुला रखें, वरना तेल संकट दुनिया को जकड़ लेगा। अमेरिका ने ताकत बढ़ाई है—2,500 मरीन्स और एम्फीबियस असॉल्ट शिप वेस्ट एशिया भेजे जा रहे हैं। ट्रंप ने साफ कहा कि अभी ईरान से डील करने को तैयार नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र और दुनिया भर के देश चिंतित हैं, लेकिन दोनों तरफ संयम की कोई उम्मीद नहीं। यह जंग अब क्षेत्रीय से वैश्विक खतरे में बदल रही है—ऊर्जा आपूर्ति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा सब दांव पर। अगर और भड़की तो थर्ड वर्ल्ड वॉर की आहट सुनाई दे सकती है।
हर पल की खबर पर नजर रखें—क्या नेतन्याहू इस धमकी से बच पाएंगे, या IRGC अपनी कसम पूरी कर देगी? दुनिया की सांसें थमी हुई हैं।




