एबीसी नेशनल न्यूज | तेहरान/दुबई/वाशिंगटन | 3 मार्च 2026
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) ने अब खुलेआम दुनिया को चुनौती दे दी है! IRGC के वरिष्ठ कमांडर और कमांडर-इन-चीफ के सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम जबारी ने राज्य मीडिया पर धमकी भरे लहजे में ऐलान किया — “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद है! जो भी जहाज गुजरने की कोशिश करेगा, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और नियमित नौसेना के बहादुर उसे आग लगा देंगे। हम एक बूंद तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे!” यह सबसे सख्त और खौफनाक बयान है, जो अमेरिका-इज़राइल की संयुक्त हमलों का सीधा बदला है — हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतोल्लाह अली खामेनेई की मौत हो चुकी है। IRGC ने 28 फरवरी से ही VHF चैनल 16 पर जहाजों को चेतावनी भेजना शुरू कर दिया था, और अब जबारी के इस ऐलान ने इसे पूर्ण बंदी में बदल दिया है — “हम तेल पाइपलाइनों पर भी हमला करेंगे, तेल की कीमतें $200 तक पहुंच जाएंगी!”
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे घातक और महत्वपूर्ण ऊर्जा चोकपॉइंट है — यहां से रोजाना 20 मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में LNG गुजरता है, जो वैश्विक तेल खपत का 20% और LNG सप्लाई का 20% है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई, कतर और ईरान जैसे तेल दिग्गजों का अधिकांश निर्यात इसी संकरे रास्ते से एशिया (चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया) और दुनिया भर में पहुंचता है। इस बंदी ने शिपिंग को पूरी तरह ठप कर दिया है — Maersk, Hapag-Lloyd, MSC जैसी बड़ी कंपनियां ट्रांजिट रोक चुकी हैं; सैटेलाइट डेटा (Kpler, MarineTraffic) के मुताबिक ट्रैफिक 70-80% तक गिर गया है, सैकड़ों टैंकर यूएई तट पर लंगर डाले अटके हैं। इंश्योरेंस कंपनियों ने पर्सियन गल्फ में वॉर-रिस्क कवरेज रद्द कर दी है, शिपिंग कॉस्ट रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
ऊर्जा बाजार में अब भयंकर आग लग चुकी है! ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स आज 6-10% उछलकर $77-82 प्रति बैरल पर पहुंच गए हैं (पिछले हफ्ते $73 से ऊपर), अमेरिकी क्रूड भी $71+ पर है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं — अगर यह बंदी लंबी चली तो कीमतें $100-150 या यहां तक कि $200 प्रति बैरल तक जा सकती हैं। गैसोलीन, डीजल, बिजली और हर चीज महंगी हो जाएगी — भारत, चीन जैसे एशियाई देश सबसे ज्यादा चोट खाएंगे, यूरोप में गैस कीमतें ट्रिपल हो सकती हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल गई है — स्टॉक मार्केट गिर रहे हैं, महंगाई का भयंकर खतरा मंडरा रहा है, और सप्लाई चेन पूरी तरह बिखर सकती है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का दावा है कि स्ट्रेट “तकनीकी रूप से बंद नहीं है,” लेकिन IRGC की धमकियों, ड्रोन-मिसाइल हमलों और जहाजों पर अटैक के डर से कोई भी जहाज गुजरने की हिम्मत नहीं कर रहा — यानी डी फैक्टो क्लोजर पूरा हो चुका है। ईरान ने पहले ही सऊदी में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले किए हैं, और अब तेल टैंकरों को “आग लगाने” की धमकी से दुनिया थर्रा रही है। ईरान की अंतरिम लीडरशिप काउंसिल (राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, ज्यूडिशियरी चीफ ग़ोलाम-हुसैन मोहसिनी-एजेई और आयतोल्लाह अलीरेज़ा अराफी) इस जंग को और तेज करने की तैयारी में है।
यह अब सिर्फ मध्य पूर्व का युद्ध नहीं रहा — यह वैश्विक ऊर्जा संकट है! अमेरिका-इज़राइल क्या इस बंदी को तोड़ने के लिए बड़ा मिलिट्री एक्शन लेंगे? या कूटनीति काम आएगी? फिलहाल, ईरान की यह आक्रामकता दुनिया को घुटनों पर लाने की कोशिश है — और सबसे ज्यादा कीमत आम आदमी चुकाएगा, जब पेट्रोल पंप पर कीमतें आसमान छू लेंगी!




