एबीसी नेशनल न्यूज | तेहरान / बीजिंग | 4 मार्च 2026
तेहरान ने एक ऐतिहासिक और बेहद साहसिक कदम उठाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से बंद करने का ऐलान किया है, लेकिन इसमें सिर्फ चीन के जहाजों को ही गुजरने की इजाजत दी गई है। यह फैसला ईरान की ओर से बीजिंग के प्रति गहरी कृतज्ञता का प्रतीक है, क्योंकि चीन ने मौजूदा युद्ध के दौरान तेहरान का खुलकर साथ दिया है। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बीच ईरान ने चीन को अपना सबसे मजबूत सहयोगी माना है, जिसने न सिर्फ कूटनीतिक स्तर पर ईरान का बचाव किया बल्कि आर्थिक मदद और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उसका साथ दिया। इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब सिर्फ चीनी जहाजों के लिए खुला रहेगा, जबकि बाकी सभी देशों के जहाजों को सख्ती से रोका जाएगा। आईआरजीसी की नौसेना इकाइयों को आदेश दिया गया है कि कोई भी अनधिकृत जहाज इस जलमार्ग से गुजरने की कोशिश करेगा तो उसे सीधे निशाना बनाया जाएगा।
यह कदम वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और ईरान जैसे देशों से निकलने वाला ज्यादातर कच्चा तेल इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। अब इस बंदी से तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, सप्लाई चेन बाधित हो सकती हैं और कई देशों में ऊर्जा संकट गहरा सकता है। ईरान का कहना है कि यह फैसला रक्षात्मक कदम है, क्योंकि अमेरिका और इजरायल के हमलों ने उसके अस्तित्व को खतरे में डाला है। चीन को विशेष छूट देकर ईरान न सिर्फ अपने मजबूत दोस्त को इनाम दे रहा है बल्कि बीजिंग की वैश्विक आर्थिक ताकत का इस्तेमाल करके पश्चिमी देशों पर दबाव बनाने की कोशिश भी कर रहा है।
इस फैसले के दूरगामी असर पहले से ही दिखने लगे हैं। दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक चीन अब बिना किसी रुकावट के फारस की खाड़ी से तेल ला सकेगा, जबकि यूरोप, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश वैकल्पिक रास्तों की तलाश में लग गए हैं। जहाजों को अब केप ऑफ गुड होप के रास्ते अफ्रीका के चारों ओर घूमना पड़ रहा है, जिससे यात्रा में हजारों मील की बढ़ोतरी हो रही है और लागत कई गुना बढ़ गई है। बीमा कंपनियां भी अब इस इलाके में जहाजों के लिए कवरेज देने से इनकार कर रही हैं या बहुत ऊंचे प्रीमियम मांग रही हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि रूस के जहाजों को भी इसी तरह की छूट मिल सकती है, क्योंकि मॉस्को भी ईरान का करीबी सहयोगी है। लेकिन फिलहाल मुख्य फोकस चीन पर है। चीनी अधिकारियों ने तेहरान से संयम बरतने की अपील की है ताकि वैश्विक व्यापार पूरी तरह ठप न हो, लेकिन साथ ही वे इस स्थिति का फायदा उठाकर ईरान के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आपात बैठकें हो रही हैं, यूरोपीय और एशियाई नेता शांति की अपील कर रहे हैं, लेकिन ईरान का रुख सख्त है। आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि जलडमरूमध्य अब पूरी तरह ईरानी नियंत्रण में है, जहां मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और नौसैनिक गश्ती इकाइयां तैनात हैं।
इतिहास में 1980 के दशक की टैंकर वॉर की यादें ताजा हो रही हैं, जब इस इलाके में लंबे समय तक संघर्ष चला था। अगर यह बंदी लंबी चली तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ सकता है, तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और कई देशों में महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है। ईरान इस कदम से दुनिया को संदेश दे रहा है कि उसके खिलाफ कोई भी कार्रवाई बिना जवाब के नहीं जाएगी, और उसके दोस्तों को विशेष दर्जा मिलेगा।




