अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान/वॉशिंगटन | 2 अप्रैल 2026
मिडिल ईस्ट में जारी टकराव अब खुली जंग की तरफ बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा Iran को “स्टोन एज” में पहुंचा देने की धमकी के बाद ईरान की सेना ने तीखा और आक्रामक पलटवार करते हुए United States और Israel को “कुचल देने” की चेतावनी दे दी है। ईरान के सैन्य नेतृत्व ने साफ शब्दों में कहा है कि यह लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है और तब तक जारी रहेगी, जब तक दुश्मन पूरी तरह झुक नहीं जाता।
ट्रंप के बयान ने हालात को अचानक विस्फोटक बना दिया। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले हफ्तों में अमेरिका ईरान पर बेहद भारी और निर्णायक हमले कर सकता है। इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में पहले से सुलग रहा तनाव भड़क उठा है। जवाब में ईरान ने साफ कर दिया कि वह किसी भी दबाव में आने वाला नहीं है और अगर हमला हुआ तो उसका जवाब “पहले से कहीं ज्यादा विनाशकारी” होगा।
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब यह केवल एक जवाबी कार्रवाई नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई है। सैन्य अधिकारियों ने कहा कि अमेरिका और इज़राइल को इसकी “भारी कीमत” चुकानी पड़ेगी। इस बयान के बाद पूरे क्षेत्र में सैन्य हलचल तेज हो गई है—मिसाइल सिस्टम अलर्ट पर हैं, सेनाएं हाई रेडीनेस में हैं और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
इस टकराव का असर सिर्फ युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं है। United States और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया है। तेल की कीमतों में उछाल, शेयर बाजारों में गिरावट और निवेशकों में डर का माहौल साफ दिखने लगा है। खास तौर पर Strait of Hormuz पर मंडराता खतरा पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बन गया है, क्योंकि यही मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति की रीढ़ माना जाता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अब हालात बेहद नाजुक मोड़ पर हैं। एक तरफ अमेरिका की आक्रामक रणनीति है, दूसरी तरफ ईरान का खुला युद्ध ऐलान—ऐसे में कूटनीति की गुंजाइश तेजी से सिमटती जा रही है। अगर आने वाले दिनों में तनाव कम नहीं हुआ, तो यह टकराव पूरे मिडिल ईस्ट को एक बड़े युद्ध में झोंक सकता है। दुनिया की नजरें तेहरान और वॉशिंगटन पर टिकी हैं। हर बयान, हर सैन्य हलचल और हर रणनीतिक कदम अब इस बात का संकेत बन चुका है कि आने वाले हफ्ते केवल मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।




