एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली / कोलंबो | 5 मार्च 2026
पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरान के युद्धपोत ‘IRIS Dena’ को डुबोने के बाद अब हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। इस घटना के एक दिन बाद ही एक दूसरा ईरानी युद्धपोत श्रीलंका की समुद्री सीमा की ओर बढ़ रहा है, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है।
श्रीलंका सरकार के मुताबिक यह युद्धपोत अभी उसकी समुद्री सीमा के बाहर मौजूद है। रिपोर्टों के अनुसार जहाज पर 100 से अधिक नौसैनिक सवार हैं और आशंका जताई जा रही है कि यह भी अमेरिकी हमले का निशाना बन सकता है। इससे पहले अमेरिकी पनडुब्बी के टॉरपीडो हमले में ‘IRIS Dena’ हिंद महासागर में डूब गया था, जिसमें कम से कम 80 से अधिक ईरानी सैनिकों की मौत हो गई थी, जबकि कई नाविक घायल हुए हैं।
इस बीच ईरान ने इजरायल पर मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं। इजरायल की सेना ने कहा है कि उसने ईरान से दागी गई कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया है। साथ ही इजरायल ने लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर नए हवाई हमले भी शुरू कर दिए हैं।
खाड़ी क्षेत्र में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। कतर, बहरीन और सऊदी अरब में भी मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई हैं। कई देशों ने अपनी हवाई सुरक्षा प्रणालियां सक्रिय कर दी हैं, जबकि कुछ जगहों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।
इस युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से गुजरने वाले तेल और गैस के जहाजों पर खतरा बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष और बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
कई देशों ने इस संकट को लेकर चिंता जताई है और सभी पक्षों से तनाव कम करने की अपील की है। हालांकि फिलहाल हालात शांत होने के बजाय और ज्यादा जटिल होते दिखाई दे रहे हैं।




