एबीसी नेशनल न्यूज | तेहरान / बीजिंग | 16 मार्च 2026
अमेरिका और इज़राइल के साथ चल रहे युद्ध के बीच ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता को मजबूत करने के लिए चीन से लगभग 1000 ‘सुसाइड प्लेन’ या कमिकेज़/लूटेरिंग मुनिशन ड्रोन (एकतरफा हमला करने वाले ड्रोन) की खरीद की है। ये ड्रोन रिमोट कंट्रोल या प्रोग्राम्ड तरीके से लक्ष्य पर पहुंचकर विस्फोट करते हैं और खुद को नष्ट कर देते हैं। सूत्रों के अनुसार, यह डील तेल के बदले हथियारों (oil-for-arms barter) के आधार पर हुई है, क्योंकि ईरान का अधिकांश क्रूड ऑयल चीन को निर्यात होता है और युद्ध के दौरान भी यह सप्लाई जारी है। बदले में चीन ने ईरान को ये घातक ड्रोन उपलब्ध कराए हैं, जिससे ईरान की ड्रोन स्वार्म (समूह हमला) क्षमता में भारी वृद्धि होने की उम्मीद है।
यह खबर सोशल मीडिया और कुछ भारतीय मीडिया चैनलों पर तेजी से वायरल हुई है, जहां इसे “1000 सुसाइड प्लेन” के रूप में पेश किया गया है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि डिलीवरी जल्द शुरू हो सकती है या कुछ हिस्से पहले ही पहुंच चुके हैं, जिससे ईरान अमेरिका-इज़राइल के हमलों का मुकाबला करने में सक्षम हो जाएगा। ये ड्रोन ईरान के घरेलू Shahed-136 मॉडल से मिलते-जुलते हैं, जो सस्ते ($20,000-$50,000 प्रति यूनिट) और बड़े पैमाने पर उत्पादित किए जा सकते हैं। ईरान पहले से ही महीने में 10,000 तक ड्रोन बना रहा है, लेकिन युद्ध में स्टॉक कम होने पर चीन से अतिरिक्त सप्लाई जरूरी हो गई।
युद्ध फरवरी 2026 में शुरू हुआ, जब अमेरिका-इज़राइल ने ईरान पर बड़े हमले किए, जिसमें सुप्रीम लीडर अली खामेनेई सहित कई शीर्ष नेता मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने गल्फ देशों (UAE, बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब, कतर आदि) पर 1000 से ज्यादा ड्रोन और सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। UAE पर सबसे ज्यादा (1400+ ड्रोन) हमले हुए, जबकि कुल मिलाकर हजारों ड्रोन गल्फ क्षेत्र में भेजे गए। इन हमलों से तेल उत्पादन प्रभावित हुआ, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग बाधित हुई और वैश्विक तेल कीमतें $100+ प्रति बैरल तक पहुंच गईं। ईरान ने इन हमलों में Shahed-136 जैसे ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया, जो सस्ते होने के कारण दुश्मन के महंगे एयर डिफेंस सिस्टम (जैसे पैट्रियट) को ओवरलोड कर देते हैं।
चीन की भूमिका सावधानीपूर्ण लेकिन महत्वपूर्ण है। विश्वसनीय रिपोर्ट्स (Reuters, Economic Times आदि) में पुष्टि है कि 2025 के Twelve-Day War के बाद चीन ने ईरान को loitering munitions (कमिकेज़ ड्रोन) रिसप्लाई किए, और oil-for-arms पैटर्न जारी है। ईरान ने जनवरी 2026 में खुद 1000+ घरेलू combat drones इंडक्ट किए थे। हालांकि, ठीक “1000 सुसाइड प्लेन” की स्पेसिफिक संख्या और “अगले कुछ दिनों में डिलीवरी” जैसी डिटेल्स मुख्यधारा अंतरराष्ट्रीय मीडिया में पूरी तरह सत्यापित नहीं हैं – ये ज्यादातर X (Twitter) पोस्ट्स और भारतीय न्यूज स्रोतों से फैली हैं, जहां sensational हेडलाइंस का इस्तेमाल होता है। कुछ रिपोर्ट्स में चीन से 300 SF-200 जैसे ड्रोन की सप्लाई का जिक्र है, जो गल्फ देशों पर इस्तेमाल हुए लेकिन पैट्रियट सिस्टम ने उन्हें इंटरसेप्ट कर लिया।
इस डील से युद्ध की स्थिति और जटिल हो सकती है, क्योंकि सस्ते ड्रोन दुश्मन की महंगी मिसाइलों को बर्बाद कर देते हैं। अमेरिका ने भी ईरान के Shahed डिजाइन से प्रेरित LUCAS कमिकेज़ ड्रोन का इस्तेमाल शुरू किया है, जो irony दिखाता है। चीन डायरेक्ट बड़े हथियार नहीं दे रहा, लेकिन छोटे सिस्टम और कंपोनेंट्स सप्लाई कर रहा है, ताकि अमेरिका-गल्फ देशों से संबंध खराब न हों। रूस भी ईरान को सपोर्ट कर रहा है, लेकिन खुले तौर पर शामिल नहीं। ईरान की अलग-थलग स्थिति कम हो रही है, जबकि युद्ध का नया चरण ड्रोन-आधारित हमलों से शुरू हो सकता है। स्थिति तेजी से बदल रही है, और अगले दिनों में ड्रोन इस्तेमाल या डिलीवरी की पुष्टि से मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ सकता है।




