एबीसी नेशनल न्यूज | 13 जनवरी 2026
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को लेकर हालात और ज्यादा डरावने होते जा रहे हैं। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने चेतावनी दी है कि एक प्रदर्शनकारी को कल फांसी दी जा सकती है। यह खबर ऐसे वक्त सामने आई है, जब ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने खुद स्वीकार किया है कि विरोध प्रदर्शनों को दबाने की कार्रवाई में करीब 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है। इस खुलासे के बाद पूरी दुनिया में चिंता और आक्रोश बढ़ गया है।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि जिन प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा दी जा रही है, उन्हें न्याय का सही मौका नहीं दिया गया। कई मामलों में सुनवाई बहुत जल्दबाजी में की गई, परिवार से मिलने नहीं दिया गया और आरोप स्वीकार कराने के लिए दबाव डाला गया। जिस युवक की फांसी की बात कही जा रही है, उसके मामले में भी यही आशंका जताई जा रही है कि उसे निष्पक्ष और खुली सुनवाई नहीं मिली।
ईरान में ये प्रदर्शन आम आदमी की रोजमर्रा की परेशानियों से जुड़े हैं। महंगाई, बेरोजगारी, महिलाओं पर सख्त नियम और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर पाबंदियों के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरे थे। लेकिन सरकार ने इन प्रदर्शनों को सख्ती से कुचलने का फैसला किया। सुरक्षा बलों की कार्रवाई में गोलियां चलीं, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुईं और कई लोगों के साथ कथित तौर पर जेलों में बुरा बर्ताव किया गया।
सरकारी अधिकारी द्वारा 2,000 मौतों का आंकड़ा बताना अपने आप में बेहद गंभीर है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि असल संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई परिवार अपने मारे गए परिजनों की जानकारी तक नहीं पा सके हैं और सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इंटरनेट बंदी और मीडिया पर पाबंदियों के चलते सच्ची तस्वीर बाहर आना मुश्किल हो रहा है।
संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं और कई देशों ने ईरान से अपील की है कि फांसी की सजा पर तुरंत रोक लगाई जाए, हिंसा खत्म की जाए और बंदियों को कानूनी अधिकार दिए जाएं। लेकिन अब तक ईरानी सरकार अपने फैसलों पर अडिग दिख रही है। ऐसे में ईरान के आम आदमी के सामने सवाल खड़ा है—क्या अपनी बात कहना अब वहां मौत को बुलावा देने जैसा हो गया है?




