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ईरान का ऐलान: अमेरिका – इज़राइल का कत्लेआम तय, अब बातचीत नहीं, सिर्फ बदला!

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एबीसी नेशनल न्यूज | तेहरान | 3 मार्च 2026

तेहरान में चल रहे युद्ध की आग अब और भड़क गई है। आयतोल्लाह अली खामेनेई की 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त एयरस्ट्राइक्स में मौत के बाद ईरान की सत्ता में भारी उथल-पुथल मची हुई है। इस संकट के बीच आयतोल्लाह अलीरेज़ा अराफी को अंतरिम लीडरशिप काउंसिल का सदस्य बनाया गया है, और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक “अर्जेंट” बयान में उन्हें “नया सुप्रीम लीडर” बताते हुए अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ बेहद आक्रामक और खौफनाक भाषा का इस्तेमाल किया गया है। यह बयान ईरान के अनऑफिशियल हैंडल @Iran_HD से जारी हुआ है, जिसमें कहा गया है कि अब बातचीत का दौर पूरी तरह खत्म हो चुका है और दुश्मनों का अंत तय है।

बयान की शुरुआत ही धमकी से होती है — “बातचीत का समय खत्म हो गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने लाल रेखा पार कर ली है, अपरिवर्तनीय नुकसान की रेखा। इस युद्ध की शुरुआत करके उन्होंने अपने ही मौत का वारंट साइन कर लिया है। उन्हें नहीं पता कि कुल्हाड़ी कब और कैसे गिरेगी, लेकिन रस्सी हमारे हाथ में है।” आगे बढ़ते हुए बयान में अमेरिका पर परमाणु खतरे को “भूत की तरह डराने” का आरोप लगाया गया है — “वे न्यूक्लियर स्पेक्टर को जैसे डरावने के औजार की तरह लहराते हैं, अपनी घमंड से अंधे होकर। उन्हें हमारी असली ताकत और हम जो कुछ भी छोड़ने को तैयार हैं, उसका कोई अंदाज़ा नहीं है।” यह शब्द ईरान की ओर से अब तक की सबसे सख्त चेतावनी माने जा रहे हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर बड़े हमलों की तरफ इशारा करता है।

इज़राइल के लिए बयान और भी घातक है — “इज़राइल का भाग्य पूरी तरह सील हो चुका है। हर हमला, हर जुर्म, हर पीड़ा जो उन्होंने पहुंचाई है, वह वापस उन्हें सताएगी। वे हमारी नज़रों में हैं — बेनकाब, असुरक्षित, शिकार बन चुके। हम लीडर की छाया में चल रहे हैं, और हर कदम बिजली का प्रहार है।” बयान का अंत इन शब्दों से होता है — “ईरान कभी नहीं झुकता। ईरान हमेशा जीतता है।” यह भाषा न सिर्फ बदले की भावना से भरी है, बल्कि यह ईरान के “एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस” और उसके प्रॉक्सी ग्रुप्स को और मजबूत करने का संकेत भी देती है, जहां से अब बड़े हमलों की आशंका बढ़ गई है।

वास्तविकता यह है कि अलीरेज़ा अराफी ईरान के संविधान के आर्टिकल 111 के तहत बने तीन सदस्यीय अंतरिम लीडरशिप काउंसिल के एक सदस्य हैं, न कि अकेले नए सुप्रीम लीडर। इस काउंसिल में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, ज्यूडिशियरी चीफ ग़ोलाम-हुसैन मोहसिनी-एजेई और अराफी शामिल हैं। यह काउंसिल अस्थायी है और Assembly of Experts (88 सदस्यीय क्लेरिकल बॉडी) द्वारा स्थायी सुप्रीम लीडर चुनने तक काम करेगी। अराफी को हार्डलाइनर और एंटी-अमेरिकन/एंटी-इज़राइल माना जाता है, और उनकी नियुक्ति से लगता है कि ईरान फिलहाल और सख्त, आक्रामक रुख अपनाएगा। लेकिन इस खास बयान की ऑफिशियल पुष्टि ईरानी स्टेट मीडिया (IRNA, ISNA) या किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय स्रोत से नहीं हुई है — यह मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जो अक्सर प्रोपगैंडा या अनवेरिफाइड कंटेंट फैलाता है।

इस बीच युद्ध का दायरा लगातार बढ़ रहा है। ईरान ने पहले ही ड्रोन अटैक से सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाया है, जबकि इज़राइल और अमेरिका की स्ट्राइक्स में दर्जनों ईरानी कमांडर मारे जा चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की कोशिशें जारी हैं, लेकिन तेहरान का यह बयान साफ संकेत देता है कि फिलहाल कोई समझौता नहीं — सिर्फ प्रतिरोध, बदला और संभावित बड़े हमले। क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ धमकी है या ईरान सच में बड़े स्केल पर जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। आने वाले घंटों और दिनों में स्थिति और साफ होगी, लेकिन फिलहाल ईरान की यह आक्रामकता पूरी दुनिया को हिलाकर रख देगी। ईरान झुकता नहीं — लेकिन क्या वो इस युद्ध में जीतेगा? समय ही बताएगा।

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