लुधियाना/चंडीगढ़ | ABC NATIONAL NEWS | 22 मार्च 2026
लागत बढ़ी, मुनाफा घटा — उद्योगों पर दोहरी मार
पंजाब का सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) सेक्टर इन दिनों बढ़ती लागत के दबाव में कराह रहा है। औद्योगिक डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने उद्योगपतियों और छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। पहले से ही कच्चे माल, बिजली और परिवहन खर्च में इजाफा झेल रहे उद्योगों के सामने अब डीजल महंगा होने से उत्पादन लागत और बढ़ गई है। इसका सीधा असर मुनाफे पर पड़ रहा है और कई इकाइयों के लिए कामकाज जारी रखना चुनौती बनता जा रहा है।
छोटे उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित
लुधियाना, जालंधर और अमृतसर जैसे औद्योगिक शहरों में छोटे और मध्यम स्तर के उद्योगों की बड़ी संख्या है, जहां डीजल का उपयोग मशीनरी चलाने, जनरेटर और परिवहन में बड़े पैमाने पर होता है। खासकर वे इकाइयां, जो बिजली कटौती के कारण डीजल जनरेटर पर निर्भर हैं, उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि डीजल के दाम बढ़ने से प्रति यूनिट उत्पादन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो गया है।
निर्यात पर भी पड़ रहा असर
पंजाब के MSME सेक्टर का एक बड़ा हिस्सा निर्यात से जुड़ा हुआ है। कपड़ा, साइकिल, ऑटो पार्ट्स और खेल सामग्री जैसे उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजे जाते हैं। लेकिन उत्पादन लागत बढ़ने से इन उत्पादों की कीमतें भी बढ़ रही हैं, जिससे विदेशी बाजार में प्रतिस्पर्धा कमजोर हो रही है। निर्यातकों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो ऑर्डर कम हो सकते हैं और उद्योगों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
व्यापारियों की सरकार से मांग
उद्योग संगठनों और व्यापारिक संस्थाओं ने राज्य और केंद्र सरकार से राहत देने की मांग की है। उनका कहना है कि औद्योगिक डीजल पर टैक्स में कटौती की जाए या MSME सेक्टर को विशेष सब्सिडी दी जाए, ताकि बढ़ती लागत के दबाव को कुछ हद तक कम किया जा सके। इसके अलावा, बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने की भी मांग उठाई गई है, जिससे डीजल पर निर्भरता घट सके।
रोजगार पर भी मंडराया खतरा
MSME सेक्टर पंजाब में लाखों लोगों को रोजगार देता है। उद्योगपतियों का कहना है कि अगर लागत इसी तरह बढ़ती रही तो कई इकाइयों को उत्पादन कम करना पड़ेगा या अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है। इससे रोजगार पर सीधा असर पड़ेगा और बड़ी संख्या में मजदूरों की आजीविका संकट में आ सकती है।
सरकार के सामने चुनौती
यह स्थिति सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। एक ओर राजस्व संतुलन बनाए रखना है, वहीं दूसरी ओर उद्योगों को राहत देना भी जरूरी है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो पंजाब का MSME सेक्टर लंबे समय तक आर्थिक दबाव में रह सकता है, जिसका असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
औद्योगिक डीजल की बढ़ती कीमतों ने पंजाब के MSME सेक्टर को मुश्किल मोड़ पर ला खड़ा किया है। अब निगाहें सरकार पर टिकी हैं कि वह उद्योगों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाती है, ताकि उत्पादन, निर्यात और रोजगार पर पड़ रहे नकारात्मक असर को रोका जा सके।




