एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 3 मार्च 2026
पश्चिम एशिया में भड़के युद्ध के बीच कांग्रेस नेता Sonia Gandhi ने भारत सरकार पर तीखा हमला बोला है। ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की हत्या पर उन्होंने सरकार की चुप्पी को “न्यूट्रल रुख” नहीं, बल्कि “जिम्मेदारी से पीछे हटना” बताया है। उनका सवाल साफ है—क्या भारत अब वैश्विक मुद्दों पर खुलकर बोलने से बच रहा है?
एक संपादकीय में सोनिया गांधी ने कहा कि यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि ऐसा घटनाक्रम है जिसने पूरी दुनिया का राजनीतिक संतुलन हिला दिया है। ऐसे में भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश की चुप्पी हैरान करने वाली है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा शांति, संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर आधारित रही है। यदि सरकार इस पर स्पष्ट रुख नहीं लेती, तो यह देश की पारंपरिक कूटनीतिक सोच से अलग संकेत देता है।
सोनिया गांधी ने यह भी याद दिलाया कि Iran के साथ भारत के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। ऊर्जा जरूरतों, क्षेत्रीय स्थिरता और व्यापारिक हितों के लिहाज से ईरान भारत के लिए महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे समय में चुप्पी साध लेना केवल एक कूटनीतिक रणनीति नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक भूमिका को सीमित करने जैसा कदम माना जा सकता है।
दूसरी ओर सरकार के सूत्रों का कहना है कि भारत स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है और सभी पक्षों से संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। उनका तर्क है कि जल्दबाजी में बयान देना सही नहीं होगा, क्योंकि क्षेत्रीय हालात बेहद संवेदनशील हैं।
फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो चुकी है। विपक्ष इसे भारत की कमजोर पड़ती आवाज के रूप में पेश कर रहा है, जबकि सरकार समर्थक इसे संतुलित और व्यावहारिक कूटनीति बता रहे हैं।
मध्य पूर्व में हालात तेजी से बदल रहे हैं। आने वाले दिनों में भारत की आधिकारिक स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। लेकिन फिलहाल यह सवाल राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में गूंज रहा है—क्या यह समझदारी भरी चुप्पी है या अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी से दूरी?




