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अमेरिका की दादागिरी पर भारत का पलटवार: डाक सेवाएं 25 अगस्त से बंद

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नई दिल्ली, 23 अगस्त 2025

भारत ने अमेरिका की व्यापारिक ज़्यादतियों और नई ड्यूटी नीति के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए 25 अगस्त से अमेरिका जाने वाली अधिकांश अंतरराष्ट्रीय डाक सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला किया है। यह निर्णय उस समय लिया गया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय निर्यात पर 25% अतिरिक्त टैरिफ और रूसी तेल की खरीद को लेकर 25% पेनल्टी थोप दी थी। नतीजा यह कि भारतीय उत्पादों पर कुल मिलाकर 50% तक का टैक्स लग गया है। भारत ने इसे सीधा “आर्थिक अत्याचार” बताया और अमेरिका की इस दादागिरी का मुकाबला करने का ऐलान कर दिया।

दरअसल, अमेरिकी प्रशासन ने नया आदेश (Executive Order No. 14324) जारी कर 29 अगस्त से 800 डॉलर तक की ड्यूटी-फ्री छूट खत्म कर दी। अब भारत से अमेरिका भेजा जाने वाला कोई भी सामान, चाहे उसकी कीमत कुछ भी हो, भारी कस्टम ड्यूटी के दायरे में आएगा। सिर्फ पत्र, दस्तावेज़ और 100 डॉलर तक के गिफ्ट आइटम पर ही छूट मिलेगी। अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) ने कठोर निर्देश जारी कर दिए हैं, जिससे भारतीय डाक विभाग तकनीकी और नीतिगत उलझनों के चलते पार्सल स्वीकार नहीं कर पा रहा है।

भारत पोस्ट ने साफ आदेश दिया है—25 अगस्त से अमेरिका के लिए कोई पार्सल, मर्चेंडाइज, लार्ज एनवलप या पैकेज स्वीकार नहीं होगा। केवल साधारण पत्र और छोटे डॉक्यूमेंट ही भेजे जा सकेंगे। जिन ग्राहकों ने पहले से बुकिंग कराई है और सामान भेजा नहीं जा सका, उन्हें रिफंड लेने की सलाह दी गई है।

यह कदम छोटे व्यापारियों, ऑनलाइन विक्रेताओं, प्रवासी भारतीयों और लाखों परिवारों के लिए सीधा झटका है। गिफ्ट भेजने से लेकर मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट तक, सब कुछ ठप होने जा रहा है। भारत के ई-कॉमर्स सेक्टर और लॉजिस्टिक्स कंपनियों में भी खलबली मच गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय सिर्फ तकनीकी वजहों से नहीं, बल्कि अमेरिका की दबंगई के खिलाफ भारत का कड़ा संदेश है। अमेरिका बार-बार व्यापारिक हथियारों से भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा था—लेकिन अब भारत ने दिखा दिया है कि वह झुकने वाला नहीं।

भारत का यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “काउंटर स्ट्राइक” की तरह देखा जा रहा है। यह सिर्फ डाक सेवा बंद करने का फैसला नहीं, बल्कि अमेरिका को यह बताने का संदेश है कि अगर व्यापार में बराबरी और सम्मान नहीं मिलेगा तो भारत अपने लोगों और छोटे कारोबारियों के हितों के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

 

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