अवधेश कुमार | नई दिल्ली 23 दिसंबर 2025
नई दिल्ली। जब श्रीलंका चक्रवात की तबाही से उबरने की कोशिश कर रहा है, तब भारत ने एक भरोसेमंद पड़ोसी और सच्चे मित्र की तरह आगे बढ़कर 450 मिलियन डॉलर (करीब 3,600 करोड़ रुपये) की राहत और पुनर्निर्माण सहायता देने का ऐलान किया है। यह मदद सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में हौसला और उम्मीद देने वाली है।
चक्रवात ने श्रीलंका में आम आदमी की जिंदगी को बुरी तरह झकझोर दिया। कई परिवारों के घर उजड़ गए, खेत-बागान तबाह हो गए और रोज़मर्रा की जरूरतें तक मुश्किल हो गईं। ऐसे समय में भारत की यह पहल उन लोगों को यह एहसास दिलाती है कि वे अकेले नहीं हैं।
इस सहायता राशि से टूटे घरों को फिर से बसाने, सड़कों-पुलों की मरम्मत, बिजली-पानी की बहाली और आजीविका को दोबारा खड़ा करने में मदद मिलेगी। भारत पहले ही राहत सामग्री और जरूरी सेवाओं के जरिए श्रीलंका के लोगों के साथ खड़ा रहा है।
भारत का साफ संदेश है कि पड़ोसी देशों के दुख-सुख में साथ खड़ा होना सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि इंसानियत का फर्ज है। संकट की इस घड़ी में भारत का हाथ थामकर श्रीलंका के लोग धीरे-धीरे फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकें, यही इस मदद का असली मकसद है। यह मदद आंकड़ों की नहीं, दिल से दिल तक पहुंचने वाली दोस्ती की मिसाल है।




