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युवाओं में बढ़ती हार्ट अटैक की घटनाएं: “लाइफस्टाइल” की अनदेखी भारी

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नई दिल्ली। 4 अगस्त 2025

हाल ही में हैदराबाद में एक 28 वर्षीय युवक की बैडमिंटन खेलते वक्त अचानक मौत ने न सिर्फ एक परिवार को गम में डुबो दिया, बल्कि पूरे समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आज का युवा, जो दिखने में तंदुरुस्त है, वह भीतर से कितना कमजोर होता जा रहा है। यह घटना कोई इत्तेफाक नहीं है। बीते कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ जिम में वर्कआउट करते हुए, क्रिकेट खेलते हुए, रनिंग के दौरान या बैडमिंटन जैसे हल्के खेल खेलते हुए युवा अचानक गिर पड़ते हैं और हार्ट अटैक की चपेट में आ जाते हैं। इन घटनाओं का बढ़ता ग्राफ यह बताता है कि अब दिल की बीमारियाँ सिर्फ बुजुर्गों की चिंता नहीं रहीं, बल्कि युवाओं के जीवन में भी यह ख़तरनाक रूप से प्रवेश कर चुकी हैं।

दिल का दौरा पहले 50 की उम्र पार करने के बाद आने वाली बीमारी मानी जाती थी, लेकिन अब 25 से 40 वर्ष की उम्र में भी हृदयाघात आम होता जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह हमारी बदलती जीवनशैली है, जिसमें अनियमित नींद, अत्यधिक तनाव, जंक फूड, प्रोसेस्ड खाना, सिगरेट और शराब की लत, बिना सलाह लिए सप्लीमेंट्स और स्टेरॉइड्स का सेवन शामिल है। खासतौर पर युवाओं में ‘फिट दिखने’ की होड़ ने उन्हें ‘अंदर से फिट’ रहने की बुनियादी समझ से दूर कर दिया है। वे वर्कआउट करते हैं, लेकिन बिना मेडिकल स्क्रीनिंग के; सप्लीमेंट्स लेते हैं, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के; खेलते हैं, लेकिन वॉर्मअप और कूलडाउन को नजरअंदाज करते हैं। नतीजा यह होता है कि शरीर की अंदरूनी प्रणाली, खासकर दिल, अचानक उस दबाव को नहीं झेल पाता और हार्ट फेलियर की स्थिति पैदा हो जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अब जरूरत है ‘रिएक्टिव’ नहीं, बल्कि ‘प्रिवेंटिव’ बनने की। कार्डियोलॉजिस्ट्स साफ कहते हैं कि 30 साल की उम्र के बाद हर किसी को ईसीजी, ईको, लिपिड प्रोफाइल और ब्लड प्रेशर की नियमित जांच करानी चाहिए। सप्ताह में पांच दिन 30 मिनट की वॉक, संयमित भोजन, डिजिटल डिटॉक्स, गहरी नींद और योग/ध्यान जैसी आदतें अपनाकर इस खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है। बैडमिंटन, रनिंग, फुटबॉल जैसे खेल बिना किसी मेडिकल क्लीयरेंस और सही हाइड्रेशन के नहीं खेले जाने चाहिए, क्योंकि पसीने के साथ निकलने वाले इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी शरीर को खतरनाक स्थिति में ले जा सकती है।

आज के युवाओं को समझना होगा कि ‘मसल्स’ से ज्यादा जरूरी है ‘मेटाबोलिक बैलेंस’, और ‘बॉडी शेप’ से ज्यादा अहम है ‘बॉडी फंक्शन’। हार्ट केवल एक अंग नहीं, जीवन की धड़कन है – और उसकी रक्षा केवल स्पोर्ट्स या जिम से नहीं होती, बल्कि सोच-समझकर चुनी गई लाइफस्टाइल से होती है। इसलिए, अगर आप भी फिटनेस को अपनी प्राथमिकता मानते हैं, तो सबसे पहले अपने दिल की सुनिए। क्योंकि जीवन की सबसे बड़ी दौड़ में, जीत उसी की होती है जो अंत तक टिके रहता है – न कि जो सबसे तेज भागता है। आपका शरीर एक मंदिर है, लेकिन उसका मुख्य द्वार दिल है – उसकी देखभाल कीजिए।

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