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महिला स्वास्थ्य को समर्पित ‘महिला आरोग्यम कक्ष’ का उद्घाटन: न्याय मंत्रालय की अनोखी पहल

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नई दिल्ली

18 जुलाई 2025

शास्त्री भवन में महिला कर्मचारियों के लिए विशेष वेलनेस स्पेस का उद्घाटन

केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने शुक्रवार को दिल्ली स्थित शास्त्री भवन में ‘महिला आरोग्यम कक्ष’ का उद्घाटन किया। यह पहल कानूनी कार्य विभाग, न्याय और विधि मंत्रालय द्वारा की गई है, जिसका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में महिला कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती को बढ़ावा देना है।

पुराने गैरेज से बना नया ऊर्जा केंद्र

यह सुविधा शास्त्री भवन के एक अप्रयुक्त गैरेज को बदलकर विकसित की गई है। इस वेलनेस कक्ष में आधुनिक फिटनेस उपकरण के साथ-साथ नर्सिंग माताओं के लिए एक निजी लेक्टेशन रूम भी बनाया गया है। इसका उद्देश्य महिलाओं को ऑफिस के कामकाज के दौरान एक ऐसा स्पेस देना है जहां वे अपनी शारीरिक और मानसिक सेहत पर ध्यान दे सकें और वर्क-लाइफ बैलेंस बना सकें।

‘हम फिट तो इंडिया फिट’ विजन को नई दिशा

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री श्री मेघवाल ने कहा, “यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘हम फिट तो इंडिया फिट’ अभियान की भावना को साकार करती है।” उन्होंने महिला कर्मचारियों को इस सुविधा का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि जब महिलाएं स्वस्थ होंगी, तभी राष्ट्र भी सशक्त होगा। उन्होंने इस कदम को एक समावेशी और सशक्त भारत की दिशा में सकारात्मक प्रयास बताया।

स्व-देखभाल की अहमियत पर जोर

न्याय सचिव डॉ. अंजू राठी राणा ने अपने संबोधन में कहा कि यह पहल सिर्फ एक कक्ष का उद्घाटन नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्म-सशक्तिकरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “महिलाएं अक्सर दूसरों का ख्याल रखते हुए खुद को पीछे रख देती हैं। यह कक्ष उन्हें याद दिलाता है कि स्वयं की देखभाल कोई स्वार्थ नहीं, बल्कि आत्मबल का आधार है।” उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि मंत्रालय आगे भी इस तरह की समावेशी और मानवीय पहल करता रहेगा।

सरकारी दफ्तरों में बदलाव की शुरुआत

‘महिला आरोग्यम कक्ष’ महज़ एक वेलनेस रूम नहीं, बल्कि सरकारी दफ्तरों के कामकाजी माहौल को नए दृष्टिकोण से देखने की एक कोशिश है — जहां कर्मचारियों की मानविक ज़रूरतों को भी प्राथमिकता दी जाती है। यह पहल न सिर्फ फिट इंडिया मूवमेंट को समर्थन देती है, बल्कि विकसित भारत की कल्पना में एक गरिमापूर्ण, स्वास्थ्यसम्मत और समावेशी प्रशासनिक संस्कृति को भी आकार देती है। महिला कर्मचारियों के कल्याण की दिशा में यह एक मील का पत्थर साबित हो सकता है, जो आने वाले समय में अन्य मंत्रालयों और सरकारी संस्थानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

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