संजीव कुमार | मुंबई 4 जनवरी 2026
टीम इंडिया से बाहर चल रहे मोहम्मद शमी को लेकर आखिरकार क्रिकेट जगत में खुलकर सवाल उठने लगे हैं। भारत के पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान ने न सिर्फ चयनकर्ताओं की सोच पर तीखा प्रहार किया है, बल्कि शमी की वापसी का “आखिरी और सबसे सीधा तरीका” भी बता दिया है। इरफान का संदेश साफ है—अगर आप फिट हैं, विकेट ले रहे हैं और मैच जिता रहे हैं, तो आपको रोकने का कोई नैतिक हक किसी के पास नहीं होना चाहिए। इरफान पठान ने बिना लाग-लपेट के कहा कि शमी जैसे मैच-विनर गेंदबाज़ को लंबे समय तक नजरअंदाज़ करना क्रिकेटिंग लॉजिक के खिलाफ है। उन्होंने चयनकर्ताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कभी फिटनेस का बहाना बनाया जाता है, कभी उम्र का, तो कभी “भविष्य की योजना” का—लेकिन जब टीम मुश्किल में होती है, तब ऐसे ही गेंदबाज़ों की सबसे ज्यादा याद आती है।
इरफान ने बताया ‘आखिरी तरीका’
इरफान पठान के मुताबिक, शमी को अब किसी बयान या सिफारिश की जरूरत नहीं है। घरेलू क्रिकेट, रणजी, विजय हजारे या IPL—जहां भी मौका मिले, वहां लगातार विकेट लेकर चयनकर्ताओं को मजबूर करना ही एकमात्र रास्ता है। इरफान ने साफ कहा, “जब आप 140 की रफ्तार से गेंद डाल रहे हों, नई गेंद से विकेट निकाल रहे हों और डेथ ओवर्स में मैच पलट रहे हों, तब चयनकर्ता आंखें बंद नहीं रख सकते।”
चयन नीति पर सीधा सवाल
इरफान का गुस्सा यहीं नहीं रुका। उन्होंने कहा कि टीम इंडिया में कई बार चयन फॉर्म से ज़्यादा धारणा पर होने लगता है। किसी खिलाड़ी को ‘पुराना’ कहकर किनारे कर देना आसान है, लेकिन यह भूल जाना कि वही खिलाड़ी बड़े टूर्नामेंट में भारत को जीत दिला चुका है—यह सबसे बड़ी गलती है।
शमी का रिकॉर्ड, जो चुप नहीं रहता
मोहम्मद शमी का रिकॉर्ड खुद गवाही देता है—चाहे ICC टूर्नामेंट हों या मुश्किल विदेशी दौरे, शमी ने बार-बार साबित किया है कि वह दबाव के खिलाड़ी हैं। ऐसे गेंदबाज़ को बाहर रखना, इरफान के शब्दों में, “टीम इंडिया की ताकत खुद कम करने जैसा” है। अब देखना यह है कि मोहम्मद शमी अपने प्रदर्शन से सिस्टम को झुकाते हैं या टीम इंडिया एक और बड़े मैच-विनर को यूं ही इंतज़ार में रखती है।




