एबीसी डेस्क 28 दिसंबर 2025
सोशल मीडिया पर किर्ति आज़ाद की एक पोस्ट चर्चा में है। उन्होंने आसान शब्दों में एक सीधा सवाल उठाया है—अगर भारत के बाहर हिंदू मंदिर आराम से बन सकते हैं और चल सकते हैं, तो फिर भारत में क्रिसमस जैसे त्योहारों पर सवाल क्यों खड़े किए जाते हैं? किर्ति आज़ाद ने अपनी पोस्ट में ISKCON (अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ) का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि ISKCON सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया में फैला हुआ है। यूरोप में इसके करीब 135 मंदिर हैं। स्पेन, इटली, फ्रांस और बेल्जियम जैसे देशों में भगवान कृष्ण के बड़े-बड़े मंदिर हैं। रूस में भी ISKCON के 30 से ज्यादा केंद्र हैं।
उन्होंने बताया कि उत्तर अमेरिका में ISKCON के 56 से ज्यादा मंदिर और संस्थान हैं। दक्षिण अमेरिका में लगभग 60 मंदिर हैं और कनाडा में 12 केंद्र काम कर रहे हैं। अफ्रीका में भी ISKCON के 69 केंद्र हैं, जिनमें डरबन का केंद्र काफी अहम माना जाता है। एशिया में भारत के बाहर इंडोनेशिया, फिलीपींस और मलेशिया जैसे देशों में करीब 80 ISKCON केंद्र हैं। ऑस्ट्रेलिया में 6 और न्यूज़ीलैंड में 4 केंद्र हैं, जहां भगवान कृष्ण की पूजा होती है।
किर्ति आज़ाद का कहना साफ है—जब दुनिया के कई देश हिंदू धर्म और मंदिरों को जगह देते हैं, तो भारत में दूसरे धर्मों के त्योहारों, खासकर क्रिसमस, पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। उनकी यह पोस्ट धार्मिक सहिष्णुता, आपसी सम्मान और साथ रहने की सोच पर एक बार फिर ध्यान दिलाती है।




