लंदन 4 नवंबर 2025
केरल के कोझिकोड एयरपोर्ट पर हुई एयर इंडिया एक्सप्रेस विमान दुर्घटना ने पूरे देश को दहलाकर रख दिया था। दुबई से लौट रहे यात्रियों में कई परिवार, बुज़ुर्ग, कामगार और बच्चे शामिल थे, लेकिन खराब मौसम और भीगे रनवे की वजह से विमान लैंडिंग के दौरान फिसलकर खाई में जा गिरा। विमान दो हिस्सों में टूट गया और चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। ऐसी अफरा-तफरी में किसी भी इंसान का बच पाना चमत्कार से कम नहीं था। इसी मंजर का गवाह वह शख़्स भी है, जिसने हादसे के बाद भावुक होकर कहा — “मैं दुनिया का सबसे भाग्यशाली इंसान हूँ। मौत मेरे सामने थी… लेकिन उसने मुझे छोड़ दिया।”
हादसे से बचे इस यात्री ने बताया कि लैंड करती उड़ान के भीतर वातावरण अचानक पूरी तरह बदल गया। सीट बेल्ट के कसाव के बावजूद उनका शरीर झटकों के साथ आगे फेंका गया और अगले ही पल विमान जोरदार धमाके के साथ टूटता हुआ महसूस हुआ। धुएँ और धूल के बीच चारों तरफ खून से लथपथ यात्री मदद के लिए चीख रहे थे। उसने कहा — “मैंने आँखें बंद करते हुए सोचा यही अंत है। लेकिन जब मैंने दोबारा आँखें खोलीं, तो खुद को मलबे के बीच जिंदा पाया।” उसकी आवाज़ कांप रही थी, पर भीतर उम्मीद की वह लौ अब भी जल रही थी जिसने उसे बाहर निकलने की हिम्मत दी।
उसने आगे बताया कि विमान की सीढ़ियों और सीटों के टुकड़ों पर चढ़ते-उतरते हुए बाहर निकलना किसी युद्धक्षेत्र में भागने जैसा था। हर तरफ टूटी सीटें, बिखरे सामान, घायल लोग और उनकी रुलाई — यह दृश्य ज़िंदगी भर उसका पीछा करेगा। लेकिन बाहर पहुँचते ही उसने उन लोगों को देखा जो फँसे यात्रियों को बाहर निकालने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे थे। स्थानीय लोगों, CISF कर्मियों और बचाव दस्ते ने बारिश और अँधेरे के बावजूद लगातार मोर्चा संभाला। उसी दौरान उसे एहसास हुआ कि वह वास्तव में बच गया है — और यह एहसास उसकी रगों में जैसे फिर से जीवन दौड़ा गया।
वह यात्री कहता है कि दुर्घटना के बाद शरीर पर चोटें, कपड़ों पर खून और चेहरे पर डर का असर तो दिखाई देता ही है, लेकिन उससे बड़ी चोट दिल के भीतर लगी है — उन लोगों की यादें जो हमेशा के लिए बिछड़ गए। “मैं उन्हें भूल नहीं सकता। हमने साथ सफर शुरू किया था… पर मंज़िल पर सब नहीं पहुँचे।” उसके शब्द सिर्फ दर्द नहीं, बल्कि उन परिवारों के प्रति संवेदना से भरे हुए हैं जिन्होंने अपनों को खो दिया।
आज अस्पताल में इलाज के दौरान जब वह अपने परिवार से वीडियो कॉल पर बात करता है, तो उनकी आँखों में सिर्फ आँसू और शुक्र है — कि उनका बेटा, भाई या पिता ज़िंदा है। वह कहता है — “मैंने मौत को बहुत पास से देखा है। अब हर सांस एक नई ज़िंदगी जैसी है। शायद इसलिए मैं खुद को सबसे ज्यादा भाग्यशाली मानता हूँ।” दर्द और सदमे के बावजूद, उसकी यह स्वीकारोक्ति हर उस इंसान के दिल को छू जाती है जो जिंदगी की कीमत समझता है।




