एबीसी नेशनल न्यूज | न्यूयॉर्क/तेहरान | 3 मार्च 2026
अरे वाह! क्या ज़माना आ गया है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मध्य पूर्व में मिसाइलों की बारिश करवा रहे हैं, ड्रोन उड़ाकर मौत का तांडव मचा रहे हैं, और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत दर्जनों अधिकारियों को ‘शांति’ की नींद सुला रहे हैं। दूसरी तरफ उनकी पत्नी, प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बैठक में बैठकर बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की बातें कर रही हैं। जैसे कोई बॉलीवुड फिल्म हो – हीरो मौत का सौदागर, हीरोइन शांति की देवी! लेकिन सवाल ये है: ये ड्रामा है, पाखंड है, या बस अमेरिकी राजनीति का वो पुराना ‘डबल स्टैंडर्ड’ जो दुनिया को मूर्ख बनाने के लिए चलता रहता है?
चलिए, पूरी कहानी सुनाते हैं, लेकिन व्यंग्य के चश्मे से। सोमवार को मेलानिया ने यूएनएससी की बैठक की अध्यक्षता की – वो भी पहली बार किसी विश्व नेता की पत्नी के रूप में। बैठक का विषय? “बच्चे, प्रौद्योगिकी और संघर्ष में शिक्षा”। वाह, कितना सुंदर! मेलानिया ने गैवल बजाया और कहा, “अमेरिका दुनिया भर के सभी बच्चों के साथ खड़ा है। मुझे उम्मीद है कि जल्द ही शांति आपकी होगी।” आगे बोलीं, “स्थायी शांति तब आएगी जब ज्ञान और समझ को हमारे सभी समाजों में पूरी तरह महत्व दिया जाएगा। ज्ञान और बुद्धि से शासित समाज ज्यादा शांतिपूर्ण होते हैं।” सुनकर लगता है जैसे कोई योग गुरु बोल रही हों, लेकिन पृष्ठभूमि में ट्रंप के आदेश पर अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए थे, जिसमें मिनाब शहर के एक लड़कियों के प्राथमिक स्कूल पर बम गिरा – ईरान के मुताबिक 165 मासूम स्कूली बच्चियां मारी गईं। UNICEF ने चेतावनी दी कि ये “लाखों बच्चों के लिए खतरनाक पल” है, और तुरंत युद्धविराम की मांग की। लेकिन मेलानिया जी? उन्होंने हमलों का नाम तक नहीं लिया, बस शांति की कामना की और अमेरिकी सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।
ईरान के यूएन राजदूत अमीर सईद इरावानी ने इसे “गहरा शर्मनाक और पाखंडपूर्ण” बताया। सही कहा! एक तरफ पति मौत का आतंक मचा रहा है, दूसरी तरफ पत्नी बच्चों की बात कर रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो बोले, “हम जानबूझकर स्कूलों को निशाना नहीं बनाते।” अरे भाई, लेकिन बम तो गिरे ना? इजरायल के राजदूत ने नागरिक मौतों पर अफसोस जताया, लेकिन रिपोर्टों में ‘विरोधाभास’ बताया। चीन के राजदूत फू कोंग ने स्कूलों पर हमलों की निंदा की और जांच की मांग की। रूस और चीन के राजदूतों ने मेलानिया का गर्मजोशी से स्वागत किया – शायद सोच रहे होंगे, “चलो, कम से कम कोई तो शांति की बात कर रहा है, भले नकली हो।”
अब गहरी राय की बात करें: ये सब एक बड़ा मजाक है, लेकिन ऐसा मजाक जो दुनिया के लाखों मासूमों की जान से खेल रहा है। ट्रंप दंपति का ये ‘डिविजन ऑफ लेबर’ कितना सुविधाजनक है – पति युद्ध का बटन दबाए, पत्नी शांति का लेक्चर दे। क्या ये अमेरिकी साम्राज्यवाद का नया रूप है? जहां एक हाथ से बम गिराओ, दूसरे से फूल बरसाओ? व्यंग्य ये है कि मेलानिया बच्चों की शिक्षा की बात कर रही हैं, लेकिन उनके पति के फैसलों से ईरान में बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं। UNICEF की चेतावनी को सुनकर लगता है जैसे दुनिया कह रही हो, “शांति आपकी होगी? पहले अपने घर में तो शांति लाओ!”
गहराई से सोचें तो ये पाखंड सिर्फ ट्रंप का नहीं, पूरी पश्चिमी दुनिया का है। एक तरफ मानवाधिकारों का ढोल पीटते हैं, दूसरी तरफ तेल और सत्ता के लिए युद्ध छेड़ते हैं। मेलानिया की ये बैठक प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि एक सफेद झूठ है – जैसे कोई युद्ध अपराधी शांति पुरस्कार मांगे। अगर सच में बच्चों की फिक्र है, तो पहले हमलों को रोकें, युद्धविराम करें, और मानवीय सहायता भेजें। वरना ये सब बस एक फोटो-ऑप है, जहां गैवल की आवाज बमों की गूंज को दबाने की कोशिश कर रही है।
कुल मिलाकर, ट्रंप दंपति का ये शो बताता है कि राजनीति में शांति सिर्फ एक शब्द है, असल में मौत का धंधा चलता है। क्या कहते हो, दुनिया? शांति आएगी, या बस और बम गिरेंगे?




