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हमास ने छोड़े 20 इजरायली बंधक, ट्रंप बोले — “जंग खत्म, अब शांति की शुरुआत”

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यरूशलम/ गाज़ा 13 अक्टूबर 2025

हमास की कैद से आज़ाद हुए 20 इजरायली नागरिक, ट्रंप ने किया मुलाकात का ऐलान

मध्य पूर्व की जटिल और रक्तपात वाली सियासत में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ आया है, जब हमास के कब्जे से 20 इजरायली बंधकों को सुरक्षित रूप से रिहा कर दिया गया है। इस मानवीय सफलता और राहत की लहर के तुरंत बाद, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ी घोषणा करते हुए यह ऐलान किया है कि वह जल्द ही इन सभी रिहा किए गए नागरिकों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करेंगे, जिससे इस भावनात्मक पल में एक राजनीतिक आयाम भी जुड़ गया है। ट्रंप ने इस घटनाक्रम को गाज़ा युद्ध का एक “निर्णायक मोड़” बताते हुए दृढ़ता से कहा है कि “अब वक्त आ गया है कि इस संघर्ष को समाप्त किया जाए और शांति की दिशा में एक ठोस कदम बढ़ाया जाए।” यह बयान उस समय आया है जब गाज़ा पट्टी में इजरायली सेना की लगातार बमबारी और हजारों की संख्या में नागरिकों की मौत के कारण विश्व स्तर पर दोनों पक्षों पर युद्धविराम पर सहमत होने का दबाव तेजी से बढ़ रहा था, जिससे यह रिहाई कूटनीतिक सफलता के पहले संकेत के रूप में सामने आई है।

‘अब जंग नहीं, इंसानियत जीतेगी’ — ट्रंप का बयान

डोनाल्ड ट्रंप, जो अमेरिकी राष्ट्रपति पद की दौड़ के बीच हाल ही में मध्य पूर्व में शांति वार्ता की पहल को लेकर काफी सक्रियता दिखा रहे थे, ने इस घटना को एक “नई शुरुआत” करार दिया है और इसका श्रेय मानवता की जीत को दिया है। उन्होंने अपने बयान में कहा — “मैं जल्द ही उन बहादुर इजरायली नागरिकों से मिलूंगा, जिन्होंने महीनों तक आतंक की अमानवीय कैद में भयानक समय बिताया है; उनकी यह रिहाई न केवल इजरायल राष्ट्र के लिए, बल्कि पूरी मानव सभ्यता और मानवता के सिद्धांतों की जीत है। अब हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जंग नहीं, बल्कि इंसानियत जीतेगी।” इस दौरान ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत भी दिया है कि वह जल्द ही गाज़ा और वेस्ट बैंक के प्रमुख नेताओं के साथ सीधी बातचीत शुरू कर सकते हैं, जिसका उद्देश्य “एक व्यापक और स्थायी शांति रोडमैप” तैयार करना होगा, जिससे क्षेत्र में स्थिरता और दीर्घकालिक शांति सुनिश्चित की जा सके। यह कदम स्पष्ट रूप से उनके चुनावी एजेंडे और अंतरराष्ट्रीय शांति-निर्माता की छवि को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

हमास ने कहा — मानवीय आधार पर रिहाई, अंतरराष्ट्रीय दबाव ने निभाई भूमिक

हमास के प्रवक्ता ने एक औपचारिक बयान जारी करते हुए इस रिहाई को “पूरी तरह से मानवीय आधार पर” लिया गया निर्णय बताया है, हालांकि, मध्य पूर्व के राजनीतिक और कूटनीतिक विश्लेषकों का व्यापक रूप से यह मानना है कि यह फैसला वास्तव में भारी और अथक अंतरराष्ट्रीय दबाव का सीधा परिणाम है। पिछले कई हफ्तों से, क़तर, मिस्र और संयुक्त राष्ट्र जैसी प्रमुख संस्थाओं और देशों ने लगातार और चुपचाप मध्यस्थता का कार्य किया, ताकि बंधक संकट का कोई शांतिपूर्ण और मानवीय समाधान निकाला जा सके। रिहा किए गए 20 लोगों के समूह में 13 महिलाएं, 4 पुरुष और 3 बच्चे शामिल थे, जिनकी पहचान स्पष्ट हुई है। इन सभी बंधकों को पहले गाज़ा के भीड़भाड़ वाले दक्षिणी हिस्से से निकाला गया और फिर उन्हें मिस्र के रफ़ा बॉर्डर क्रॉसिंग के रास्ते इजरायल पहुंचाया गया, जहां इजरायली सेना ने गहन सुरक्षा जांच के बाद उन्हें आखिरकार उनके लंबे समय से प्रतीक्षारत और भावुक परिवारों से मिलवाया।

इजरायल में खुशी और राहत का माहौल, परिवारों की आंखों में आंसू और उम्मीद

तेल अवीव और यरूशलेम सहित पूरे इजरायल में, रिहा किए गए बंधकों के परिवारों और व्यापक समुदाय ने इस घटना को “जीवन की दूसरी शुरुआत” और एक चमत्कारी अवसर कहा है। एक रिहा महिला बंधक की मां ने मीडिया से बात करते हुए अपनी भावनाओं को व्यक्त किया — “हमने महीनों तक भगवान से केवल यही प्रार्थना की थी कि हमारा बच्चा सुरक्षित लौट आए; जब बच्चा वापस आ गया है, तो बाकी सब कुछ, चाहे वह संपत्ति हो या कुछ और, हम फिर से बना सकते हैं।” पूरा इजरायल इस महत्वपूर्ण रिहाई को एक राष्ट्रीय उत्सव और बड़ी राहत के रूप में मना रहा है। इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए अमेरिका, क़तर और मिस्र को सार्वजनिक रूप से धन्यवाद दिया है और इस रिहाई को “क्षेत्रीय शांति की दिशा में उठाया गया पहला ठोस और निर्णायक कदम” बताया है।

ट्रंप की कूटनीति: चुनावी एजेंडे से लेकर मध्य पूर्व की भूमिका तक

डोनाल्ड ट्रंप का यह उच्च-स्तरीय हस्तक्षेप, जैसा कि विश्लेषकों का मानना है, केवल मानवीय सरोकार या कूटनीतिक आवश्यकता से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह उनकी महत्वाकांक्षी राजनीतिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। अमेरिका में अगले साल राष्ट्रपति चुनाव होने हैं, और ट्रंप खुद को अमेरिकी मतदाताओं के सामने एक बार फिर “वैश्विक शांति निर्माता” और “संकटमोचक” के रूप में पेश करने का प्रयास कर रहे हैं — यह वही छवि है जिसे उन्होंने 2018 में उत्तर कोरिया के साथ ऐतिहासिक वार्ता के दौरान सफलतापूर्वक स्थापित किया था। उनके राजनीतिक समर्थक इस कदम को “ट्रंप डिप्लोमेसी की शक्तिशाली वापसी” कह रहे हैं और इसे उनकी अद्वितीय नेतृत्व क्षमता का प्रमाण बता रहे हैं। वहीं, उनके आलोचक यह तर्क दे रहे हैं कि ट्रंप इस गाज़ा मुद्दे को अपने चुनावी नैरेटिव में शामिल करके इसका राजनीतिकरण कर रहे हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पकड़ और प्रभाव को एक बार फिर से मजबूती से प्रदर्शित किया जा सके और अपने राजनीतिक आधार को बढ़ाया जा सके।

जब राजनीति और मानवता साथ खड़ी हों

हमास की कैद से 20 इजरायली नागरिकों की सुरक्षित रिहाई केवल एक तात्कालिक राजनयिक सफलता या एक युद्धविराम का छोटा हिस्सा मात्र नहीं है, बल्कि यह व्यापक स्तर पर मानवता और मानवीय मूल्यों की असली जीत है। डोनाल्ड ट्रंप का यह राजनीतिक बयान, जिसमें उन्होंने शांति की शुरुआत की घोषणा की है, भले ही उनके चुनावी उद्देश्यों से प्रेरित हो, लेकिन इसमें एक अकाट्य और सार्वभौमिक स्वीकारोक्ति भी छिपी हुई है कि “हर जंग का अंत अंततः बातचीत और संवाद से ही होता है, न कि गोला-बारूद से।” गाज़ा के इस भीषण संघर्ष में यह रिहाई एक महत्वपूर्ण शुरुआत है — और शायद यह वह महत्वपूर्ण क्षण है, जब दुनिया ने एक बार फिर यह महसूस किया कि सबसे शक्तिशाली ताकत बंदूक नहीं, बल्कि अटूट संवाद और मानवीय मध्यस्थता होती है।

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