अहमदाबाद 24 सितंबर 2025
गुजरात हाईकोर्ट ने अहमदाबाद की मशहूर 400 साल पुरानी Mancha मस्जिद से जुड़ी एक अहम याचिका पर सुनवाई करते हुए मस्जिद प्रबंधन ट्रस्ट की दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कर दिया कि अहमदाबाद नगर निगम (AMC) द्वारा जारी किया गया नोटिस और सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई कानूनन वैध है। हाईकोर्ट ने ट्रस्ट की उस मांग को अस्वीकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि मस्जिद का हिस्सा तोड़ने की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। अदालत का यह फैसला अब इस ऐतिहासिक मस्जिद के एक हिस्से को तोड़े जाने का रास्ता साफ करता है।
मस्जिद और विवाद का पृष्ठभूमि
Mancha मस्जिद अहमदाबाद के सरसपुर इलाके में स्थित है और इसका इतिहास लगभग 400 साल पुराना बताया जाता है। यह मस्जिद स्थानीय मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक आस्थाओं से जुड़ी हुई है। अहमदाबाद नगर निगम ने सड़क चौड़ीकरण की योजना के तहत मस्जिद के एक हिस्से को हटाने का नोटिस जारी किया था। निगम का कहना है कि यह निर्णय शहर में ट्रैफिक दबाव को कम करने और बेहतर शहरी नियोजन के लिए जरूरी है। दूसरी ओर, मस्जिद ट्रस्ट का कहना है कि यह वक्फ संपत्ति है और इसे संरक्षित धार्मिक धरोहर माना जाना चाहिए, जिस पर कोई अतिक्रमण या तोड़फोड़ नहीं होनी चाहिए।
ट्रस्ट की दलीलें और कानूनी पहलू
मस्जिद ट्रस्ट ने अदालत के सामने दलील दी कि नगर निगम द्वारा जारी नोटिस और कार्रवाई पूरी तरह से गैरकानूनी है। ट्रस्ट का आरोप था कि यह फैसला नगर आयुक्त के स्तर पर नहीं बल्कि एक डिप्टी एस्टेट ऑफिसर द्वारा लिया गया, जबकि कानूनन इसका अधिकार आयुक्त को ही है। ट्रस्ट ने यह भी कहा कि वक्फ अधिनियम (Waqf Act) के तहत किसी भी धार्मिक संपत्ति पर ऐसी कार्रवाई करने से पहले विशेष प्रक्रिया अपनाना जरूरी होता है। ट्रस्ट ने हाईकोर्ट से अपील की कि वह नगर निगम को रोकने का आदेश जारी करे ताकि मस्जिद का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बरकरार रहे।
सरकार और नगर निगम का पक्ष
राज्य सरकार और अहमदाबाद नगर निगम ने मस्जिद ट्रस्ट की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि सड़क चौड़ीकरण परियोजना सार्वजनिक हित में है। सरकारी पक्ष का कहना था कि अहमदाबाद शहर के विकास और यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए यह कदम आवश्यक है और इसके लिए जो नोटिस जारी किया गया है, वह पूरी तरह से विधि सम्मत है। उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ अधिनियम की शर्तें इस मामले में लागू नहीं होतीं, क्योंकि यह कार्रवाई शहरी विकास और ट्रैफिक नियोजन की प्रक्रिया का हिस्सा है। अदालत ने सरकार और निगम की इस दलील को सही मानते हुए ट्रस्ट की याचिका खारिज कर दी।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया और आगे की राह
हाईकोर्ट के इस फैसले से मस्जिद ट्रस्ट और स्थानीय मुस्लिम समुदाय में निराशा देखने को मिली है। उनका कहना है कि यह मस्जिद सिर्फ इबादतगाह नहीं बल्कि इतिहास और विरासत का हिस्सा है। ट्रस्ट का इरादा अब सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का हो सकता है ताकि मस्जिद को बचाने की अंतिम कोशिश की जा सके। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि शहरी विकास और सड़क चौड़ीकरण जैसे जनहित के प्रोजेक्ट्स में ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों को किस तरह सुरक्षित रखा जाए। अहमदाबाद और गुजरात ही नहीं, बल्कि पूरे देश में इस तरह के मसले विकास बनाम विरासत की चुनौतियों को सामने लाते हैं।




