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क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, दिल्ली NCR में 2nd ICAE-2026 में ‘विकास की नई परिभाषा’ पर वैश्विक विशेषज्ञों की चर्चा

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डॉ. निपुनिका शाहिद, असिस्टेंट प्रोफेसर; राशि गुप्ता एवं निष्ठा त्रिपाठी, छात्राएँ, मीडिया स्टडीज़, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज़, क्राइस्ट (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), दिल्ली एनसीआर

गाज़ियाबाद, 26 फरवरी 2026

क्राइस्ट (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), दिल्ली एनसीआर परिसर के सोशल साइंसेज़ स्कूल के अर्थशास्त्र विभाग ने वी. वी. गिरी राष्ट्रीय श्रम संस्थान (VVGNLI) के सहयोग से 25–26 फरवरी 2026 को 2nd International Conference on Advancing Economics (ICAE-26) का सफल आयोजन किया। दो दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का विषय था — “Redefining Growth: Integrating Economy, Society, and Sustainability for a Resilient Future.”
सम्मेलन के मुख्य अतिथि प्रो. राकेश मोहन जोशी, कुलपति, आईआईएफटी, नई दिल्ली ने मुख्य व्याख्यान दिया। उन्होंने बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि टैरिफ़ पर अत्यधिक निर्भरता से वस्तुओं की कीमतें बढ़ती हैं और वैश्विक बाज़ार में अस्थिरता उत्पन्न होती है। उन्होंने अनिश्चित समय में विविधीकरण और रणनीतिक योजना की आवश्यकता पर जोर दिया।

मुख्य वक्ताओं में जर्मनी के यूनिवर्सिटी ऑफ बॉन के डॉ. डेविड वुएप्पर और वियतनाम के यूनिवर्सिटी ऑफ इकॉनॉमिक्स एंड फाइनेंस के डॉ. माजो जॉर्ज शामिल रहे। उन्होंने कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सतत विकास अर्थशास्त्र पर अपने विचार साझा किए।
दो दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश से प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया। विभिन्न तकनीकी सत्रों में ऑफलाइन और ऑनलाइन माध्यम से शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
सम्मेलन के प्रमुख विषयों में शामिल रहे:
* श्रम बाज़ार और जेंडर
* डिजिटल वित्तीय समावेशन
* जलवायु परिवर्तन और सतत विकास
* शासन और राजनीतिक अर्थव्यवस्था
* स्वास्थ्य प्रणाली और लोक नीति
देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से विद्वान, संकाय सदस्य, शोधार्थी और पेशेवर विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी की।
भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग की संयुक्त निदेशक (मैक्रो) सुश्री गुरविंदर कौर ने विशेष संबोधन दिया। उन्होंने भारत की व्यापक आर्थिक रणनीति, राजकोषीय प्रबंधन और वैश्विक अर्थव्यवस्था में सतत विकास के महत्व पर अपने विचार रखे। उनका संबोधन अकादमिक शोध और वास्तविक नीति दृष्टिकोण के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु साबित हुआ।
सम्मेलन का समापन वैलिडिक्टरी सत्र के साथ हुआ, जिसमें वी. वी. गिरी राष्ट्रीय श्रम संस्थान के महानिदेशक डॉ. अरविंद तथा एनसीएईआर की प्रोफेसर डॉ. बोरनाली भंडारी की गरिमामयी उपस्थिति रही।

सम्मेलन की अध्यक्षता स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज़ की प्रमुख डॉ. शिवानी चौधरी , सह-अध्यक्षता अकादमिक कोऑर्डिनेटर डॉ. जितेन्द्र भंडारी ने की तथा संयोजक के रूप में डॉ. अमित कुमार, डॉ. फराज़ अहमद और डॉ. सुसंथिका ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ICAE-26 शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और संस्थानों के बीच सार्थक संवाद का एक सशक्त मंच सिद्ध हुआ। इस सम्मेलन ने सिद्धांत, नीति और व्यवहार को एक साथ जोड़ते हुए अर्थशास्त्र और सतत विकास के क्षेत्र में क्राइस्ट यूनिवर्सिटी की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया।

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