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पेट्रोल-डीजल छोड़ो

पेट्रोल-डीजल छोड़ो, नहीं तो सख़्ती तय — गडकरी के तेवर से ऑटो सेक्टर में हलचल

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सुनील कुमार | नई दिल्ली 29 दिसंबर 2025

देश में पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों को लेकर सरकार अब नरम मूड में नहीं दिख रही। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक सार्वजनिक मंच से ऐसा बयान दिया है, जिसने ऑटोमोबाइल उद्योग से लेकर आम वाहन मालिक तक को सोचने पर मजबूर कर दिया है। गडकरी ने साफ़ शब्दों में कहा कि अगर पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम नहीं हुई, तो सरकार और सख़्त उत्सर्जन नियम (Euro-6) लागू करने से पीछे नहीं हटेगी।

गडकरी का लहजा इस बार बेहद सख़्त था। उन्होंने मज़ाकिया लेकिन चेतावनी भरे अंदाज़ में कहा कि वह ट्रांसपोर्ट मंत्री हैं और उनके पास “डंडा” भी है। उनका इशारा साफ़ था—या तो ऑटो इंडस्ट्री और लोग स्वच्छ ईंधन की ओर बढ़ें, या फिर कड़े नियमों के लिए तैयार रहें। इस बयान के बाद ऑटो सेक्टर में नई बहस छिड़ गई है कि आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल वाहनों का भविष्य क्या होगा।

फ्लेक्स-फ्यूल और इथेनॉल पर सरकार का ज़ोर

गडकरी ने बताया कि सरकार अब फ्लेक्स-फ्यूल इंजन, इथेनॉल, CNG और अन्य वैकल्पिक ईंधनों को तेज़ी से बढ़ावा दे रही है। उनका कहना है कि इससे न सिर्फ़ प्रदूषण कम होगा, बल्कि किसानों को भी फायदा मिलेगा, क्योंकि इथेनॉल उत्पादन सीधे तौर पर कृषि से जुड़ा है। सरकार चाहती है कि आने वाले वर्षों में गाड़ियां ऐसे ईंधन पर चलें, जो सस्ता भी हो और पर्यावरण के लिए कम नुकसानदेह भी।

स्वच्छ ईंधन अपनाओ, सब्सिडी पाओ

सरकार सिर्फ़ चेतावनी ही नहीं दे रही, बल्कि प्रोत्साहन भी दे रही है। गडकरी ने कहा कि जो वाहन निर्माता या उपभोक्ता वैकल्पिक ईंधन आधारित मशीनें और वाहन अपनाएंगे, उन्हें सब्सिडी और अन्य आर्थिक सुविधाएं दी जाएंगी। खासकर कृषि और निर्माण क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों पर सरकार 5% तक की सब्सिडी देने की तैयारी में है।

हाइड्रोजन ट्रक: भविष्य की झलक

अपने भाषण में गडकरी ने हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रकों का भी ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि देश में अब ऐसे ट्रकों का परीक्षण किया जा चुका है, जिनमें कुछ हाइड्रोजन-डीजल मिश्रण से चलते हैं, जबकि कुछ पूरी तरह हाइड्रोजन फ्यूल-सेल तकनीक पर आधारित हैं। यह संकेत है कि सरकार भारी वाहनों को भी साफ़ ऊर्जा की ओर ले जाना चाहती है।

प्रदूषण कम, आत्मनिर्भरता ज़्यादा

गडकरी का साफ़ संदेश था कि पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता सिर्फ़ प्रदूषण ही नहीं बढ़ाती, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा पर भी असर डालती है। वैकल्पिक ईंधन अपनाने से भारत आयात पर निर्भरता कम कर सकता है और आत्मनिर्भर बन सकता है। उनका मानना है कि यही रास्ता देश को साफ़ हवा और मज़बूत अर्थव्यवस्था दोनों दे सकता है।

आम आदमी और उद्योग के लिए क्या मतलब?

इस बयान के बाद सवाल उठता है कि इसका असर आम वाहन मालिक पर क्या पड़ेगा। क्या पेट्रोल-डीजल वाहन महंगे हो जाएंगे? क्या नए नियमों से पुरानी गाड़ियों पर दबाव बढ़ेगा? ऑटो इंडस्ट्री के लिए भी यह एक साफ़ संकेत है कि अब उन्हें भविष्य की तकनीकों में तेज़ी से निवेश करना होगा। कुल मिलाकर, नितिन गडकरी का यह बयान सिर्फ़ चेतावनी नहीं, बल्कि नीति की दिशा बदलने का संकेत है। आने वाले समय में भारत की सड़कों पर कैसी गाड़ियां दौड़ेंगी—यह अब सिर्फ़ बाज़ार नहीं, बल्कि सरकार भी तय करने जा रही है।

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