अंतरराष्ट्रीय डेस्क 5 दिसंबर 2025
जर्मनी की संसद बुंडेस्टाग ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए 18 वर्षीय युवाओं के लिए स्वैच्छिक सैन्य सेवा कार्यक्रम को बहाल करने के पक्ष में मतदान किया, जो रूस के यूक्रेन पर पूर्ण हमले के बाद जर्मनी की सुरक्षा नीति में सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। 2011 में अनिवार्य सैन्य सेवा खत्म करने वाले जर्मनी ने अब सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए नया रास्ता चुना है, जिसके तहत जनवरी 2026 से देश के हर 18 साल के युवक को एक अनिवार्य फॉर्म भेजा जाएगा जिसमें पूछा जाएगा कि क्या वह सेना में शामिल होने के इच्छुक हैं। महिलाओं के लिए यह फॉर्म भले स्वैच्छिक होगा, लेकिन पुरुषों के लिए इसे भरना अनिवार्य रहेगा। यह बदलाव जर्मन चांसलर फ़्रीडरिख मर्ज़ की उस घोषणा के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि जर्मनी यूरोप की सबसे शक्तिशाली पारंपरिक सेना बनाएगा।
लेकिन इस फैसले ने जर्मनी भर में युवाओं के बीच भारी विरोध भी खड़ा कर दिया है। शुक्रवार को लगभग 90 शहरों में स्कूल छात्र हड़ताल पर जाएंगे, जबकि कई शहरों में हजारों युवाओं के सड़कों पर उतरने की तैयारी है। छात्र संगठनों ने एक बयान में कहा, “हम अपनी ज़िंदगी के छह महीने बैरक में बंद रहकर अनुशासन, आदेश मानना और ‘मारना सीखना’ नहीं चाहते… युद्ध हमारा भविष्य नहीं बना सकता, वह हमारे भविष्य को नष्ट करता है।” हैम्बर्ग में ही लगभग 1,500 छात्रों के विरोध में शामिल होने की उम्मीद है, लेकिन स्कूल प्रशासन ने माता-पिता को चेतावनी दी है कि बच्चे बिना अनुमति स्कूल न छोड़ें। बुंडेस्टाग के बाहर भी विरोध प्रदर्शन हुआ जहाँ प्रदर्शनकारियों ने “No to military service” लिखी बैनर उठाए हुए थे।
जर्मन संसद में यह फैसला 323 बनाम 272 वोट से पास हुआ और इसके साथ ही जर्मनी उन यूरोपीय देशों की सूची में शामिल हो गया जो बदलती वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए युवाओं के लिए सैन्य सेवा को फिर से शुरू कर रहे हैं। पिछले महीने फ्रांस ने 18–19 साल के युवाओं के लिए 10 महीने की स्वैच्छिक सैन्य ट्रेनिंग का ऐलान किया था, जो यूरोप में बढ़ते सुरक्षा दबावों को दर्शाता है। जर्मनी के रक्षा मंत्री बॉरिस पिस्टोरियस ने कहा कि 2027 से पुरुषों के लिए अनिवार्य मेडिकल परीक्षा शुरू होगी ताकि हम यह तेज़ी से तय कर सकें कि “हमले की स्थिति में कौन मातृभूमि की रक्षा के लिए सक्षम है और कौन नहीं।”
जर्मनी की सेना बुंडेसवेहर में इस समय करीब 1,82,000 सैनिक हैं, और सरकार अगले साल तक 20,000 और सैनिक जोड़ना चाहती है। दीर्घकालिक लक्ष्य 2030 के शुरुआती वर्षों तक सैनिकों की संख्या बढ़ाकर 2,60,000 करना और लगभग 2 लाख रिज़र्विस्ट तैयार रखना है ताकि नाटो की नई आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि यदि सुरक्षा स्थिति और खराब हुई या स्वैच्छिक सैनिकों की संख्या पर्याप्त नहीं रही, तो बुंडेस्टाग अनिवार्य सैन्य सेवा को फिर से लागू करने पर विचार कर सकता है।
शीत युद्ध के दौर में जर्मनी के पास लगभग 5 लाख सैनिक थे, लेकिन 1990 के दशक में यूरोप में लंबे शांति काल के कारण सेना को काफी घटा दिया गया। 2011 में एंजेला मर्केल सरकार ने अनिवार्य सैन्य सेवा को समाप्त कर दिया था। लेकिन अब रूस से बढ़ते खतरे और अमेरिका—विशेषकर ट्रंप प्रशासन—के दबाव ने जर्मनी को अपनी सैन्य नीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।
सरकार ने युवाओं के लिए आकर्षक प्रोत्साहन भी घोषित किए हैं—जिन्हें सैन्य सेवा के दौरान लगभग €2,600 प्रति माह मिलेगा, जबकि फ्रांस में यह राशि €800 है। इस बीच, बुंडेस्टाग में आज एक और बड़ा मुद्दा—पेंशन सुधार बिल—भी मतदान के लिए रखा गया, जो गठबंधन सरकार के लिए संकट पैदा कर सकता था। लेकिन विपक्षी वामपंथी पार्टी ने मतदान से दूरी बनाकर सरकार को राहत दे दी।
कुल मिलाकर, जर्मनी में यह फैसला सुरक्षा नीति के दशकों पुराने ढांचे को बदल देगा। जहाँ सरकार इसे यूरोप की रक्षा मजबूत करने के लिए जरूरी मानती है, वहीं युवा पीढ़ी इसे अपने भविष्य पर अनचाहा बोझ बता रही है। आने वाले महीनों में यह मुद्दा सिर्फ सैन्य नीति नहीं, बल्कि जर्मनी के सामाजिक और राजनीतिक माहौल का सबसे महत्वपूर्ण बहस का केंद्र बनने जा रहा है।




