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बिहार मिशन पर गहलोत — लालू परिवार संग मुलाकात से बढ़ी कांग्रेस-राजद नजदीकी

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राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री अशोक गहलोत ने बिहार की राजधानी पटना में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनके पुत्र और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, तथा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से बेहद महत्वपूर्ण मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद, गहलोत ने ‘इंडिया’ गठबंधन की एकजुटता और बिहार चुनाव को लेकर अपनी बात रखी, जिसमें उन्होंने गठबंधन में किसी भी तरह की फूट की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए, भाजपा के प्रायोजित दुष्प्रचार का पर्दाफाश किया। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सीट बंटवारे और कुछ सीटों पर ‘दोस्ताना मुकाबले’ की खबरों के चलते महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठाए जा रहे थे। गहलोत का पटना दौरा और लालू परिवार से मिलना, गठबंधन के डैमेज कंट्रोल और शीर्ष स्तर पर समन्वय स्थापित करने की एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

आशोक गहलोत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि AICC के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लेवरु की उपस्थिति में हुई यह बैठक बेहद सकारात्मक रही है और इसने यह सुनिश्चित कर दिया है कि बिहार में ‘इंडिया’ गठबंधन पूरी तरह से एकजुट है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गठबंधन के सभी घटक दल, जिनमें कांग्रेस और राजद प्रमुख हैं, पूरी मजबूती और एक साझा लक्ष्य के साथ चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कल होने वाली महागठबंधन की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सभी घटक दलों के बीच की स्थिति और चुनावी तालमेल की पूरी तस्वीर जनता के सामने स्पष्ट कर दी जाएगी। 

 गहलोत ने इस बात पर रोशनी डाली कि शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद और समन्वय पूरी तरह से कायम है, और किसी भी छोटे-मोटे मतभेद को आपसी बातचीत से सुलझा लिया गया है। उनकी इस घोषणा का मुख्य उद्देश्य कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच आत्मविश्वास को बहाल करना है, जो हालिया मीडिया अटकलों से विचलित हो सकते थे।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने मीडिया के एक बड़े वर्ग में चल रहे विवादों को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) द्वारा प्रायोजित एक सुनियोजित राजनीतिक अभियान करार दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी, जो बिहार में महागठबंधन की बढ़ती ताकत से घबरा गई है, उसने जानबूझकर महागठबंधन में फूट डालने और चुनावी माहौल को दूषित करने के उद्देश्य से एक भ्रामक और नकारात्मक प्रचार तंत्र चलाया।

 इस कैंपेन का मकसद यह था कि बिहार की जनता के मन में यह धारणा पैदा हो जाए कि महागठबंधन के भीतर बड़ा आंतरिक घमासान मचा हुआ है। श्री गहलोत ने ऐसी सभी खबरों को ‘प्रायोजित कैंपेन’ का हिस्सा बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि महागठबंधन की असलियत में कोई बड़ी आंतरिक परेशानी नहीं है, बल्कि उसके सभी नेता और कार्यकर्ता एकजुट होकर भाजपा के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं। 

गहलोत ने स्वीकार किया कि 243 सीटों वाली विधानसभा में, कुछ ‘5-7’ सीटें ऐसी हो सकती हैं जहां स्थानीय नेताओं की महत्वाकांक्षाओं या विशिष्ट क्षेत्रीय समीकरणों के कारण ‘फ्रेंड्ली फाइट’ जैसी परिस्थिति उत्पन्न हो गई हो। उन्होंने तर्क दिया कि इतनी बड़ी संख्या में सीटों में यह संख्या बेहद छोटी और नगण्य है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि इस छोटी सी संख्या को भाजपा और उसके समर्थक मीडिया ने महागठबंधन के खिलाफ एक बड़े ‘कैंपेन’ का आधार बना लिया, ताकि यह दर्शाया जा सके कि गठबंधन टूट की कगार पर है। 

उन्होंने साफ किया कि यह स्थिति कोई गंभीर संकट नहीं है, बल्कि चुनाव के दौरान अक्सर देखने को मिलने वाली एक छोटी-मोटी विसंगति है, और इसका पूरे गठबंधन की एकजुटता पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा। गहलोत ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि बिहार की जनता बदलाव के लिए पूरी तरह से तैयार है और वह इस बात को अच्छी तरह समझती है कि प्रदेश और देश के हित में ‘इंडिया’ गठबंधन की जीत ही एकमात्र रास्ता है।

 

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