कभी निगरानी, दमन और बंदी शिविरों के लिए बदनाम रहा चीन का झिंजियांग प्रांत अब एक ‘सपनों का पर्यटन स्थल’ बनकर उभर रहा है। सिल्क रूट की ऐतिहासिक गलियों, बर्फ से ढके पहाड़ों और रेगिस्तानी सौंदर्य के बीच अब चमचमाती सड़कों, थीम पार्क्स और लक्ज़री होटलों की चकाचौंध दिखती है। चीन सरकार ने इस क्षेत्र को “नया झिंजियांग — खुशहाल झिंजियांग” के नारे के साथ ऐसा रूप दिया है कि मानो यह जगह किसी पर्यटन पोस्टकार्ड से बाहर निकल आई हो।
हालिया सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025 के पहले छह महीनों में झिंजियांग में पर्यटकों की संख्या 13 करोड़ से अधिक हो गई — जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी है। काशगर और उरुमकी जैसे शहर अब हाई-स्पीड रेल से जुड़े हैं, जहां रंगीन बाज़ारों, पारंपरिक नृत्य और स्थानीय व्यंजनों का उत्सव हर दिन चलता है। बीजिंग दावा कर रहा है कि यह “राष्ट्रीय एकता और विकास” की मिसाल है — और झिंजियांग अब आतंकवाद या अस्थिरता नहीं, बल्कि समृद्धि और संस्कृति का प्रतीक बन गया है।
लेकिन इस चमक के पीछे छिपा अंधेरा कई सवाल उठाता है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इसे “इमेज क्लीनिंग ऑपरेशन” कहा है — यानी एक सजाई-संवारी सच्चाई, जो असली दर्द को ढक देती है। पश्चिमी रिपोर्टों के अनुसार, झिंजियांग में आज भी सख्त निगरानी तंत्र, चेहरा पहचान कैमरे और पुलिस चौकियां हर गली में मौजूद हैं। उइगर मुसलमानों की धार्मिक गतिविधियों पर नियंत्रण जारी है, और पारंपरिक संस्कृति को ‘पर्यटन प्रदर्शन’ में बदल दिया गया है।
फिर भी, चीन अपने अभियान को एक “शांति और स्थिरता की सफलता कहानी” के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। सरकारी मीडिया इसे “विश्व के लिए नया सांस्कृतिक पर्यटन मॉडल” कह रहा है, जहां “आर्थिक विकास ने कट्टरपंथ की जगह ली है।” झिंजियांग में 5-स्टार होटल, रेगिस्तान सफारी, और ऐतिहासिक कारवां रूट अब विदेशी निवेशकों को भी आकर्षित कर रहे हैं।
एक विदेशी पर्यटक ने कहा — “यहां सब कुछ खूबसूरत है, पर हर मुस्कान के पीछे डर झलकता है।” विशेषज्ञों का मानना है कि झिंजियांग अब दो चेहरों वाला प्रदेश बन चुका है — एक जो सेल्फी में चमकता है, और दूसरा जो निगरानी कैमरे की परछाई में दबा है। कह सकते हैं कि चीन ने झिंजियांग को सजाया जरूर है, लेकिन सवाल अब भी बाकी है — क्या यह पर्यटन का पुनर्जागरण है या सत्य का पुनर्लेखन?




