रश्मि | नई दिल्ली, 30 दिसंबर 2025
देश की राजनीति में पहचान रखने वाले गांधी–वाड्रा परिवार से जुड़ी एक सादगी भरी और उम्मीद जगाने वाली खबर सामने आई है। प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा अपने जीवन की नई शुरुआत की ओर बढ़ रहे हैं। उनकी होने वाली जीवनसाथी अवीवा बैग एक ऐसी युवती हैं, जिन्होंने अपनी पहचान किसी राजनीतिक विरासत से नहीं, बल्कि मेहनत, हुनर और रचनात्मक सोच से बनाई है। वे भारत की नेशनल फुटबॉल टीम का हिस्सा रह चुकी हैं और खेल के मैदान में अनुशासन, संघर्ष और टीम भावना को करीब से जिया है।
कला, कैमरा और कल्पनाओं की दुनिया
25 वर्षीय अवीवा बैग दिल्ली की एक फोटोग्राफर, क्रिएटिव प्रोड्यूसर और उद्यमी हैं। वे Atelier 11 की सह-संस्थापक हैं—एक ऐसा क्रिएटिव स्टूडियो जो विज़ुअल स्टोरीटेलिंग के जरिए ब्रांड्स और लोगों की कहानियां कहता है। उनकी फोटोग्राफी सिर्फ तस्वीरें नहीं, बल्कि जीवन की सादगी, उलझनों और भावनाओं का शांत बयान है।
जहां तस्वीरें बोलती हैं
अवीवा का काम कई प्रतिष्ठित मंचों पर सराहा गया है। ‘You Cannot Miss This’ (2023), India Art Fair – Young Collector Programme (2023), ‘The Illusory World’ (2019) और India Design ID (2018) जैसी प्रदर्शनियों में उनकी रचनाओं ने दर्शकों को ठहरकर देखने और महसूस करने पर मजबूर किया। कला जगत में उन्हें ऐसी युवा कलाकार के रूप में देखा जाता है, जो कम शब्दों में गहरी बात कह देती हैं।
खेल के मैदान से आर्ट गैलरी तक
कम लोग जानते हैं कि अवीवा कैमरे के साथ-साथ फुटबॉल के मैदान में भी अपनी पहचान बना चुकी हैं। राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी अवीवा के व्यक्तित्व में अनुशासन और टीमवर्क आज भी साफ झलकता है, जो उनके प्रोफेशनल जीवन को मजबूती देता है।
परिवार, शिक्षा और सोच
अवीवा दिल्ली से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता इमरान बेग व्यवसायी हैं और मां नंदिता कथपालिया बेग एक जानी-मानी इंटीरियर डिजाइनर हैं, जिन्होंने कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन के डिजाइन में भी योगदान दिया है। अवीवा ने मॉडर्न स्कूल से पढ़ाई की और ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी से मीडिया कम्युनिकेशन व जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया।
सादगी में गहराई
सोशल मीडिया पर भी अवीवा दिखावे से दूर रहती हैं। उनकी पहचान धर्म या नाम से ज्यादा उनके काम और सोच से बनती है। रेहान वाड्रा के साथ सात साल के रिश्ते के बाद अब दोनों इसे नया नाम देने जा रहे हैं। यह कहानी सिर्फ एक हाई-प्रोफाइल सगाई की नहीं, बल्कि उस पीढ़ी की है जो नाम से नहीं, अपने काम से पहचानी जाना चाहती है।




