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विष्णु देव साय के राज में खेत से समृद्धि तक, किसान बना विकास का आधार

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18 जुलाई 2025

छत्तीसगढ़ — जिसे धान का कटोरा कहा जाता है, सदियों से कृषिप्रधान रहा है। यहाँ के किसान केवल अन्नदाता नहीं, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और समाज की रीढ़ हैं। लेकिन यह कटोरा कभी उपज से भरा तो रहा, पर किसान की थाली हमेशा अभाव और अनिश्चितता से जूझती रही। भाजपा शासन, विशेषकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में, इस ऐतिहासिक विसंगति को दूर करने की ठानी। अब छत्तीसगढ़ का किसान केवल उत्पादक नहीं, प्रबंधक, व्यापारी, और नवाचारकर्ता बन रहा है — और कृषि अब केवल गुज़ारे का साधन नहीं, गौरव और गरिमा का परिचायक बन चुकी है।

भाजपा शासन की कृषि नीति की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उसने किसान को केंद्र में रखकर सोचने की संस्कृति शुरू की। “खेत को बाजार से जोड़ो, किसान को तकनीक से जोड़ो, और उत्पाद को सम्मान दो” — इसी दृष्टिकोण के तहत राज्य में सिंचाई, बीज, समर्थन मूल्य, भंडारण, विपणन, जैविक खेती और एग्री-बिज़नेस को एक एकीकृत प्रणाली के रूप में पुनर्गठित किया गया। धान खरीदी के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने पूरे देश के लिए मॉडल खड़ा किया — सीधे खाते में भुगतान, ऑनलाइन पंजीयन, पारदर्शी तोल प्रणाली, और रकबा सत्यापन जैसे कदमों ने किसान का विश्वास लौटाया।

गोधन न्याय योजना भाजपा शासन की वह अभिनव पहल है जिसने गाय को अर्थव्यवस्था से जोड़ा और परंपरा को प्रौद्योगिकी में बदलने का मार्ग प्रशस्त किया। अब गांवों में गोठानों के माध्यम से किसान गोबर बेच रहा है, वर्मी कंपोस्ट बना रहा है, बायोगैस से ऊर्जा पैदा कर रहा है, और इन सबके ज़रिए अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहा है। यह योजना न केवल कृषि को जैविक बना रही है, बल्कि गांवों में महिला सशक्तिकरण, पशुपालन और हरित अर्थव्यवस्था की बुनियाद भी रख रही है।

भाजपा शासन ने किसानों को केवल बीज और पानी देने तक सीमित नहीं रखा — उसने उन्हें बाज़ार और ब्रांड से जोड़ा। “मुख्यमंत्री कृषि उद्यम योजना”, “कृषि यांत्रिकीकरण मिशन”, “जैविक मंडी हब”, और “स्टार्टअप एग्रीकल्चर सपोर्ट स्कीम” जैसी योजनाओं ने किसानों को क्लस्टर आधारित खेती, अनुबंध खेती, मूल्य संवर्धन और प्रोसेसिंग की ओर प्रेरित किया। अब छत्तीसगढ़ का किसान केवल मंडी का इंतज़ार नहीं करता, वह एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) बनाकर अपना माल दिल्ली, मुंबई और दुबई तक भेज रहा है।

सिंचाई के क्षेत्र में भाजपा सरकार ने दूरदर्शी सोच दिखाई। नहरों का जीर्णोद्धार, माइक्रो इरिगेशन को सब्सिडी, बोरवेल योजना, और सौर पंप योजना के माध्यम से लाखों हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचित किया गया, जिससे अब दोहरी और तिहरी फसल का मार्ग प्रशस्त हुआ है। साथ ही, मौसम आधारित फसल बीमा योजना को सरल और त्वरित भुगतान प्रणाली से जोड़कर किसान को सुरक्षा कवच दिया गया।

भाजपा शासन ने किसान को तकनीक से जोड़ने के लिए कृषि एप्स, ड्रोन सेवा, कृषि परामर्श कॉल सेंटर, और ई-मंडी पोर्टल की शुरुआत की। इससे न केवल फसल का मूल्य सही मिला, बल्कि कृषि में युवाओं की भागीदारी भी बढ़ी। अब गांवों के युवा खेती को पिछड़ा काम नहीं, आधुनिक उद्यम मानने लगे हैं — और यह बदलाव कृषि के भविष्य को दिशा देता है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की विशेष पहल रही कि हर किसान को सम्मान और संबल मिले। “कृषि सम्मान समारोह”, “किसान विज्ञान यात्रा”, “फार्मर फर्स्ट नीति” के तहत किसानों को पुरस्कार, प्रशिक्षण, अध्ययन भ्रमण, और राष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुति का अवसर मिला। इससे किसान की पहचान अब केवल खेत तक सीमित नहीं रही — वह राज्य निर्माण का नेतृत्वकर्ता बन गया।

निष्कर्षतः, भाजपा शासन ने छत्तीसगढ़ के किसान को केवल सहायता प्राप्त करने वाला नहीं, बल्कि विकास को दिशा देने वाला नेतृत्वकर्ता माना। अब छत्तीसगढ़ का किसान मजबूरी में नहीं, गर्व से खेती करता है। खेतों में अब केवल अन्न नहीं, आशा, आत्मनिर्भरता और आत्मगौरव भी उपजते हैं। भाजपा की कृषि नीति ने परंपरा, प्रकृति और प्रौद्योगिकी को एकसाथ जोड़कर छत्तीसगढ़ की धरती को समृद्धि की राह पर अग्रसर किया है — यही “नवछत्तीसगढ़ का हरित संकल्प” है।

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