एबीसी नेशनल न्यूज | ढाका | 17 फरवरी 2026
बांग्लादेश में आज का दिन केवल एक औपचारिक शपथ ग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे देश की राजनीति में बड़े बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। Bangladesh Nationalist Party (BNP) की स्पष्ट बहुमत वाली जीत के बाद उसके चेयरमैन तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। राजधानी ढाका स्थित Jatiya Sangsad Bhaban के साउथ प्लाज़ा में आयोजित भव्य समारोह में नवनिर्वाचित सांसदों को भी शपथ दिलाई गई। इस मौके पर बड़ी संख्या में विदेशी प्रतिनिधि, राजनयिक और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
यह घटनाक्रम इसलिए ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि 1990 के बाद पहली बार बांग्लादेश को एक पुरुष प्रधानमंत्री मिला है। लंबे समय तक देश की राजनीति महिला नेतृत्व के इर्द-गिर्द घूमती रही, ऐसे में यह बदलाव प्रतीकात्मक और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से अहम माना जा रहा है। 12 फरवरी को हुए आम चुनाव में BNP ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जिसके बाद सरकार गठन का रास्ता साफ हो गया और तेजी से औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की गईं।
शपथ ग्रहण के साथ ही एक और मुद्दा चर्चा में है—नए सांसदों की संभावित दोहरी शपथ। “जुलाई नेशनल चार्टर” के तहत प्रस्तावित संवैधानिक सुधार परिषद के सदस्य के रूप में भी सांसदों को शपथ दिलाए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि इस पर राजनीतिक मतभेद सामने आए हैं और कुछ नेताओं ने मौजूदा संविधान में “डबल ओथ” के प्रावधान पर सवाल उठाए हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि सुधार परिषद किस स्वरूप में काम करेगी।
भारत की ओर से इस समारोह में ओम बिरला शामिल हुए। भारत के विदेश मंत्रालय ने इसे दोनों देशों के बीच मजबूत और ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक बताया है। साथ ही South Asian Association for Regional Cooperation (सार्क) देशों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया। बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
तारिक रहमान ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस की जगह पदभार संभाला। 2024 के छात्र आंदोलन और उसके बाद बने राजनीतिक घटनाक्रमों ने देश की दिशा बदल दी थी। अब चुनावी जनादेश के बाद सत्ता फिर से निर्वाचित सरकार के हाथों में आ गई है। BNP की स्थापना पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान ने की थी, और पार्टी की सत्ता में वापसी को उसकी राजनीतिक विरासत की पुनर्स्थापना के रूप में देखा जा रहा है।
संक्षेप में, बांग्लादेश एक नए राजनीतिक दौर में प्रवेश कर चुका है। शपथ ग्रहण के साथ केवल सरकार नहीं बदली है, बल्कि संवैधानिक सुधारों और प्रशासनिक ढांचे में संभावित बदलावों की शुरुआत भी हो गई है। अब पूरे क्षेत्र की नजर इस बात पर है कि नई सरकार स्थिरता, सुधार और आर्थिक चुनौतियों से कैसे निपटती है।




