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बिहार से ओडिशा तक छठ महापर्व की छटा: औरंगाबाद और कोणार्क सूर्य मंदिर में श्रद्धा, आस्था और सूर्योपासना का अद्भुत संगम

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नई दिल्ली 26 अक्टूबर 2025

छठ महापर्व, सूर्य उपासना का यह अनुपम पर्व, इस बार भी पूरे देश में अपार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। बिहार से लेकर ओडिशा तक, गंगा किनारे से लेकर सागर तट तक, हर जगह सूर्य भगवान की अराधना का भव्य दृश्य देखने को मिल रहा है। इस पर्व का सबसे पवित्र और ऐतिहासिक स्वरूप जहां बिहार के औरंगाबाद के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर में दिखता है, वहीं इसकी सांस्कृतिक और स्थापत्य भव्यता ओडिशा के कोणार्क सूर्य मंदिर में दिखाई देती है।

औरंगाबाद सूर्य मंदिर: बिहार की आस्था का केंद्र

बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित देव सूर्य मंदिर छठ पर्व की आत्मा कहा जाता है। यहां प्राचीन काल से ही श्रद्धालु अस्ताचलगामी और उदयमान सूर्य को अर्घ्य देने आते हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर की स्थापना स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने की थी। छठ के चार दिनों के दौरान यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं, जिनमें बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और देश के अन्य राज्यों से आने वाले भक्त शामिल हैं। पूरे परिसर में दीपों की रौशनी और लोकगीतों की गूंज श्रद्धा की एक अनुपम अनुभूति कराती है।

कोणार्क सूर्य मंदिर: ओडिशा में सूर्य की भव्य प्रतिमा

ओडिशा का कोणार्क सूर्य मंदिर, जिसे “ब्लैक पैगोडा” के नाम से भी जाना जाता है, न केवल भारत का बल्कि पूरी दुनिया का स्थापत्य चमत्कार है। 13वीं सदी में गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम द्वारा निर्मित यह मंदिर सूर्य देव को समर्पित है। छठ के अवसर पर यहां देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं और सागर तट पर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। कोणार्क में छठ का दृश्य आध्यात्मिकता और प्राकृतिक सुंदरता का ऐसा संगम बन जाता है, जो दर्शकों के मन को मोह लेता है।

छठ: प्रकृति, संस्कृति और शुद्धता का पर्व

छठ केवल एक पूजा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति की सबसे पवित्र अभिव्यक्तियों में से एक है। इसमें सूर्य की उपासना के साथ जल, वायु, अग्नि और पृथ्वी – इन पांच तत्वों के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। महिलाएं 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं, जो त्याग, तप और आत्मशुद्धि का प्रतीक है।

बिहार के घाटों से लेकर ओडिशा के तटों तक, छठ महापर्व भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रमाण है। चाहे औरंगाबाद का सूर्य मंदिर हो या कोणार्क का भव्य स्थापत्य – दोनों स्थानों पर श्रद्धा और आस्था का सूरज एक समान प्रकाशमान रहता है, जो बताता है कि भारतीय परंपरा की जड़ें कितनी गहरी और विराट हैं।

 यात्रा सुझाव: अगर आप इस छठ पर कुछ अनोखा अनुभव करना चाहते हैं, तो एक बार देव सूर्य मंदिर (औरंगाबाद) और कोणार्क सूर्य मंदिर (ओडिशा) की यात्रा जरूर करें – जहां आस्था और इतिहास साथ-साथ सांस लेते हैं।

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