राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 20 मार्च 2026
9 घंटे में दिल्ली से उड़ कर दिल्ली पहुंचा विमान
हिंदी सिनेमा के दिग्गज गायक Kishore Kumar का मशहूर अंदाज़—“जाना था जापान, पहुंच गए चीन”—इस बार महज एक गीत की पंक्ति नहीं, एक कड़वी हकीकत बनकर सामने आया। एयर इंडिया की एक बड़ी चूक ने यात्रियों को ठीक ऐसी ही स्थिति में डाल दिया, जहां लंबा सफर तय करने के बावजूद मंज़िल हाथ नहीं लगी। दिल्ली से कनाडा के वैंकूवर के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट AI-185 ने सामान्य रूप से उड़ान भरी, लेकिन कुछ घंटों बाद ही स्थिति बदल गई। विमान जब चीन के हवाई क्षेत्र के ऊपर पहुंच चुका था, तभी उसे अचानक वापस दिल्ली लौटने के निर्देश दिए गए। यह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि संचालन स्तर पर हुई गंभीर चूक का परिणाम था।
इस अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लिए गलत विमान तैनात कर दिया गया था। एयर इंडिया ने बोइंग 777-200LR विमान को उड़ान पर भेज दिया, जबकि कनाडा के लिए आवश्यक अनुमति और कॉन्फ़िगरेशन किसी अन्य श्रेणी के विमान के लिए थी। जैसे ही यह गलती सामने आई, विमान को तत्काल यू-टर्न लेना पड़ा।
करीब 9 घंटे तक आसमान में रहने के बाद यात्रियों को वहीं लौटना पड़ा, जहां से उन्होंने अपनी यात्रा शुरू की थी। इस पूरी घटना ने यात्रियों को भारी असुविधा में डाल दिया। कई यात्रियों की कनेक्टिंग फ्लाइट्स छूट गईं, महत्वपूर्ण मीटिंग्स और कार्यक्रम प्रभावित हुए, और लंबी उड़ान के बाद फिर से दिल्ली लौटना उनके लिए बेहद थकाऊ अनुभव साबित हुआ।
एयर इंडिया ने इस घटना को “ऑपरेशनल इश्यू” करार देते हुए कहा है कि सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया गया और सभी यात्रियों को सुरक्षित वापस लाया गया। एयरलाइन ने यह भी दावा किया कि यात्रियों के लिए वैकल्पिक उड़ानों, ठहरने और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई।
हालांकि, विमानन विशेषज्ञ इस सफाई से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में विमान का चयन, मार्ग की अनुमति और नियामकीय मंजूरी बेहद सख्त प्रक्रिया के तहत होती है। ऐसे में इस स्तर की चूक यह संकेत देती है कि सिस्टम के भीतर कहीं न कहीं गंभीर खामी मौजूद है।
यह घटना सिर्फ एक “फ्लाइट टू नोव्हेयर” नहीं, बल्कि एयर इंडिया के संचालन तंत्र पर एक बड़ा सवालिया निशान है। अब देखना यह होगा कि इस चूक के लिए जिम्मेदारी तय होती है या नहीं, और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए क्या ठोस सुधार किए जाते हैं।




