एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 16 फरवरी 2026
नई दिल्ली: क्या सरकार की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग की कीमत इतनी भारी हो सकती है? इसी सवाल के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने डिजिटल न्यूज पोर्टल NewsClick और उसके संस्थापक एवं चीफ एडिटर प्रबीर पुरकायस्थ को ₹184 करोड़ का पेनल्टी नोटिस जारी कर दिया है। यह कार्रवाई Foreign Exchange Management Act (FEMA) के कथित उल्लंघन के तहत की गई है। ED के अनुसार, ₹120 करोड़ का जुर्माना NewsClick कंपनी पर और ₹64 करोड़ का दंड व्यक्तिगत रूप से प्रबीर पुरकायस्थ पर लगाया गया है। एजेंसी का कहना है कि यह कदम कई वर्षों से चल रही जांच का परिणाम है, जिसमें विदेशी फंडिंग और रेमिटेंस के नियमों के उल्लंघन के आरोपों की पड़ताल की जा रही थी।
ED का आरोप है कि 2018-19 से 2023-24 के बीच प्राप्त विदेशी निवेश (FDI) और अन्य रेमिटेंस के मामलों में नियामकीय शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि विदेशी धन के स्रोत और उसके उपयोग को लेकर संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष कथित रूप से अधूरी या भ्रामक जानकारी प्रस्तुत की गई। कुछ लेन-देन संरचनाओं में कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें FEMA प्रावधानों के विरुद्ध बताया गया है। इन्हीं आधारों पर यह भारी आर्थिक दंड प्रस्तावित किया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें वर्ष 2020 में दर्ज उस मामले से जुड़ी हैं, जब दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने विदेशी फंडिंग को लेकर प्राथमिक जांच शुरू की थी। इसके बाद 2021 में ED ने NewsClick के दफ्तरों और संबंधित ठिकानों पर छापेमारी की। अक्टूबर 2023 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने प्रबीर पुरकायस्थ को एक अलग मामले में गिरफ्तार भी किया था, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई। तब से लेकर अब तक NewsClick लगातार जांच एजेंसियों की कार्रवाई का सामना कर रहा है।
दूसरी ओर, NewsClick और प्रबीर पुरकायस्थ ने इन आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने सभी विदेशी निवेश वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप प्राप्त किए और उनका उपयोग किया। उनका यह भी दावा है कि पोर्टल की संपादकीय नीति स्वतंत्र रही है और किसी भी विदेशी शक्ति या संस्था के निर्देश पर सामग्री प्रकाशित करने का आरोप पूरी तरह निराधार है। उन्होंने संकेत दिया है कि वे इस नोटिस को कानूनी मंच पर चुनौती देंगे।
2009 में स्थापित NewsClick डिजिटल मीडिया के उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है, जो सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर सरकार की नीतियों की आलोचनात्मक समीक्षा करता रहा है। यही कारण है कि इस ताजा कार्रवाई को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है। एक पक्ष इसे वित्तीय नियमों के अनुपालन का मामला बता रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे प्रेस स्वतंत्रता और असहमति की आवाज़ पर दबाव के रूप में देख रहा है।
₹184 करोड़ के इस FEMA नोटिस के बाद मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर लंबी लड़ाई की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में अदालतों और अपीलीय प्राधिकरणों में होने वाली सुनवाई इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी, जिस पर मीडिया जगत, राजनीतिक दलों और नागरिक समाज की नजरें टिकी हुई हैं।




