एबीसी नेशनल न्यूज | 8 फरवरी 2026
हरियाणा के फरीदाबाद में आयोजित सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला 7 फरवरी 2026 की शाम उस वक्त दहशत और अफरातफरी में बदल गया, जब मेले में लगा एक हाई-स्पीड पेंडुलम/स्विंग राइड अचानक टूटकर गिर गया। यह हादसा शाम करीब 6:15 बजे हुआ, जब मेला अपने चरम पर था और बड़ी संख्या में परिवार, महिलाएं और बच्चे झूलों का आनंद ले रहे थे। चंद सेकंड में खुशियों का माहौल चीख-पुकार, भगदड़ और खून से सने मंजर में तब्दील हो गया।
कैसे हुआ हादसा — 360 डिग्री घूमने वाला झूला टूटा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जिस झूले को ‘सुनामी’ या ‘टॉप स्पिन’ कहा जा रहा है, वह 360 डिग्री में तेज रफ्तार से घूमने वाला बड़ा स्विंग राइड था। अचानक उसमें तकनीकी खराबी आई और पहले उसका एक सिरा टूटकर नीचे गिर गया। लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले दूसरा सिरा भी गिर पड़ा। उस समय झूले पर 18 से 26 लोग सवार बताए जा रहे हैं। झूला टूटते ही वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, लोग अपने बच्चों और परिजनों को ढूंढते हुए इधर-उधर भागने लगे। हैरानी की बात यह रही कि इसी शाम करीब एक घंटे पहले मेले के गेट नंबर-2 पर स्वागत द्वार गिरने से भी दो लोग घायल हुए थे, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा इंतजामों को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
मौके पर डटे रहे इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद — जान की परवाह नहीं की
हादसे के समय ड्यूटी पर तैनात उत्तर प्रदेश कैडर के पुलिस इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद ने बिना देर किए हालात संभालने की जिम्मेदारी संभाली। पलवल में तैनात और मूल रूप से मथुरा (यूपी) निवासी इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद ने घायलों को झूले के मलबे से बाहर निकालने, लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और भीड़ को नियंत्रित करने का काम शुरू किया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वे लगातार लोगों से शांत रहने की अपील कर रहे थे और खुद आगे बढ़कर बचाव में लगे थे।
झूले का हिस्सा गिरा, अस्पताल में तोड़ा दम — शहीद का दर्जा
बचाव कार्य के दौरान ही झूले का एक भारी हिस्सा अचानक इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद के सिर पर आ गिरा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत बादशाह खान सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत नाजुक बताई। तमाम कोशिशों के बावजूद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई। हरियाणा पुलिस के डीजीपी ने उनकी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए उन्हें शहीद का दर्जा देने की घोषणा की।
हादसे के आंकड़े — 1 मौत, 13 घायल
इस दर्दनाक हादसे में कुल 13 लोग घायल हुए, जिनमें बच्चे, आम नागरिक और पुलिसकर्मी शामिल हैं। घायलों का इलाज सरकारी और निजी अस्पतालों में किया गया। आधिकारिक तौर पर एक मौत—इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद—की पुष्टि की गई है। कुछ प्रारंभिक रिपोर्टों में अन्य मौतों की भी चर्चा हुई, लेकिन प्रशासन ने फिलहाल एक ही मौत की पुष्टि की है।
सरकार का ऐलान — एक करोड़ मुआवजा, परिजन को नौकरी
हादसे के बाद हरियाणा पुलिस महानिदेशक ने शहीद इंस्पेक्टर के परिवार के लिए बड़े राहत पैकेज का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि शहीद के परिजनों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाएगा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्य के पर्यटन मंत्री ने भी गहरा शोक व्यक्त किया, घटनास्थल का दौरा किया और घायलों से अस्पताल में मुलाकात की।
आयोजकों पर FIR, SIT से जांच — सुरक्षा पर सवाल
प्रशासन ने इस हादसे को गंभीरता से लेते हुए मेला आयोजकों और झूला वेंडर के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। शुरुआती जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और तकनीकी जांच में लापरवाही की बात सामने आई है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है, जो यह तय करेगी कि झूले की फिटनेस जांच कब हुई, किसकी अनुमति से इसे चलाया गया और हादसे की जिम्मेदारी किस पर बनती है। हादसे वाले झूला क्षेत्र को सील कर दिया गया है, हालांकि प्रशासन ने सुरक्षा समीक्षा के साथ मेला जारी रखने का फैसला किया है।
शहादत को सलाम — सिस्टम पर खड़े हुए गंभीर सवाल
रिटायरमेंट से कुछ ही महीने दूर इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद वर्ष 2020 में पुलिस मेडल से सम्मानित किए जा चुके थे। उनकी शहादत ने एक बार फिर बड़े आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी निरीक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूरजकुंड मेले का यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है—और यह याद दिलाता है कि ड्यूटी निभाते हुए जान गंवाने वाले ऐसे पुलिसकर्मी सच मायनों में देश के शहीद होते हैं।




