एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 23 फरवरी 2026
सोशल मीडिया पर तिरंगे में लिपटे सैनिकों के ताबूतों की एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसे नियंत्रण रेखा (LoC) पर हालिया पाकिस्तानी फायरिंग से जोड़ते हुए भारतीय सैनिकों के शहीद होने का दावा किया गया। कई पोस्ट्स में तस्वीर के साथ भावनात्मक संदेश और सैन्य नुकसान की बातें लिखी गईं, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। हालांकि पड़ताल में यह दावा भ्रामक पाया गया और तस्वीर का वर्तमान घटनाओं से कोई संबंध नहीं निकला।
वायरल पोस्ट में क्या किया गया दावा
वायरल सामग्री में कहा गया कि हाल में LoC पर भारी गोलीबारी हुई, जिसमें भारतीय सेना को नुकसान हुआ और कई जवान शहीद हो गए। कुछ पोस्ट्स में इसे सीमा पर बढ़ते तनाव और कथित सैन्य कार्रवाई से जोड़कर साझा किया गया, जबकि तस्वीर को हालिया घटना का प्रमाण बताया गया। भावनात्मक अपील और सैन्य संदर्भ के कारण यह पोस्ट तेजी से विभिन्न प्लेटफॉर्म पर फैलती चली गई।
जांच में सामने आई सच्चाई
फैक्ट चेक में रिवर्स इमेज सर्च और उपलब्ध फोटो आर्काइव की जांच से स्पष्ट हुआ कि वायरल तस्वीर नई नहीं है। यह फोटो वर्ष 2013 की है, जब पुंछ सेक्टर में हुए हमले के बाद शहीद जवानों के ताबूतों के साथ सैनिक श्रद्धांजलि देते दिखाई दे रहे थे। उस समय की मीडिया कवरेज और फोटो डेटाबेस में यह तस्वीर दर्ज है, जिससे यह साफ हो गया कि इसे हालिया घटना के रूप में प्रस्तुत करना गलत और भ्रामक है।
हालिया LoC स्थिति पर तथ्य
उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स में सीमा पर सतर्कता और घुसपैठ की कोशिशों की खबरें जरूर सामने आई हैं, लेकिन वायरल दावे के अनुसार हालिया फायरिंग में भारतीय सैनिकों के शहीद होने की पुष्टि नहीं हुई। सुरक्षा एजेंसियों ने संदिग्ध गतिविधियों को नाकाम करने और निगरानी बढ़ाने की जानकारी दी है, परन्तु वायरल तस्वीर से जुड़ी घटना की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली।
पुरानी तस्वीरों से दुष्प्रचार का खतरा
सुरक्षा और सैन्य घटनाओं से जुड़ी पुरानी तस्वीरों को नए संदर्भ में साझा करना सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार का आम तरीका बनता जा रहा है। भावनात्मक विषय होने के कारण ऐसी पोस्ट तेजी से वायरल होती हैं और लोगों की भावनाओं को प्रभावित करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सत्यापन सैन्य घटनाओं से जुड़ी सामग्री साझा करना न केवल भ्रम फैलाता है बल्कि सुरक्षा संबंधी संवेदनशीलता भी बढ़ा सकता है।
जांच में स्पष्ट हुआ कि तिरंगे में लिपटे सैनिकों की वायरल तस्वीर हालिया LoC फायरिंग की नहीं बल्कि वर्ष 2013 की घटना से जुड़ी है। वर्तमान संदर्भ में इसे साझा कर भारतीय सैनिकों के शहीद होने का दावा भ्रामक है। सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि सैन्य या संवेदनशील घटनाओं से जुड़ी किसी भी तस्वीर या सूचना को साझा करने से पहले विश्वसनीय स्रोतों से उसकी पुष्टि अवश्य करें।





