सुमन कुमार। नई दिल्ली 16 दिसंबर 2025
ईवीएम–वीवीपैट (EVM–VVPAT) की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर आक्रामक तेवर अपनाते हुए सरकार और चुनाव प्रबंधन प्रणाली पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस का कहना है कि वीवीपैट को जिस उद्देश्य से लाया गया था—मतदाता को अपने वोट की सत्यापित पुष्टि देने के लिए—उसी उद्देश्य को आज व्यवस्था के भीतर कमजोर किया जा रहा है। पार्टी ने याद दिलाया कि वीवीपैट का अस्तित्व सुप्रीम कोर्ट के 2013 के उस ऐतिहासिक फैसले से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने स्पष्ट कहा था कि “वोटर वेरिफ़ाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल” लोकतंत्र की शुचिता के लिए अनिवार्य है। इसके बावजूद, वर्षों से उठ रही मांगों को अनसुना किया जा रहा है।
राज्यसभा में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वीवीपैट से पहले ईवीएम में ऐसा कोई सॉफ्टवेयर नहीं था जो प्रतीक (सिंबल) को पहचान सके। वीवीपैट आने के बाद ही यह तकनीकी परत जुड़ी—और ठीक यहीं से पारदर्शिता का सवाल खड़ा होता है। कांग्रेस की मांग है कि देश को यह बताया जाए कि वीवीपैट में कौन-सा सॉफ्टवेयर इस्तेमाल हो रहा है, उसका सोर्स क्या है, उसकी ऑडिटिंग कैसे होती है और उसकी जवाबदेही किसके पास है। पार्टी का तर्क है कि जब लोकतंत्र मशीन पर टिका है, तो मशीन के ‘दिमाग’ यानी सॉफ्टवेयर पर पर्दा डालना जनता के अधिकारों के साथ खिलवाड़ है।
कांग्रेस ने यह भी रेखांकित किया कि माइक्रोप्रोसेसर वाली कोई भी मशीन किसी इंसान के आदेश का पालन नहीं करती—वह सॉफ्टवेयर के निर्देशों पर चलती है। ऐसे में यह तर्क कि सब कुछ “प्रक्रिया” के भरोसे सुरक्षित है, लोकतंत्र को आश्वस्त नहीं कर सकता। इसी आधार पर पार्टी ने वीवीपैट पर्ची को बॉक्स में गिराने की मौजूदा व्यवस्था पर कड़ा ऐतराज़ जताया और मांग की कि मतदाता को वीवीपैट स्लिप हाथ में दी जाए—रसीद की तरह—ताकि मतदान की वास्तविक पुष्टि मतदाता के पास रहे, न कि केवल सिस्टम के भीतर बंद हो जाए।
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार और चुनाव प्रबंधन संस्थाएं पारदर्शिता बढ़ाने के बजाय सवाल पूछने वालों को ही कटघरे में खड़ा करने की रणनीति अपना रही हैं। पार्टी के मुताबिक, अगर व्यवस्था में सब कुछ निष्पक्ष और सुरक्षित है, तो सॉफ्टवेयर की जानकारी देने, स्वतंत्र ऑडिट और मतदाता-संतोषजनक सत्यापन से डर क्यों? कांग्रेस ने चेताया कि लोकतंत्र भरोसे से चलता है, और भरोसा तभी बनता है जब सवालों के जवाब मिलें—खामोशी और टालमटोल से नहीं।
अंत में कांग्रेस ने दो टूक कहा कि यह बहस किसी दल की जीत-हार की नहीं, बल्कि हर मतदाता के अधिकार की है। वीवीपैट का उद्देश्य केवल दिखावटी पारदर्शिता नहीं, बल्कि वास्तविक सत्यापन होना चाहिए। जब तक सॉफ्टवेयर की पारदर्शिता, स्वतंत्र ऑडिट और मतदाता को ठोस सत्यापन नहीं मिलता, तब तक EVM–VVPAT पर उठते सवाल लोकतंत्र के केंद्र में बने रहेंगे—और कांग्रेस इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है।




