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भाजपा राज में हर वर्ग को मिला हक, सेवा बनी शासन की पहचान

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रायपुर, छत्तीसगढ़ 

23 जुलाई 2025

सत्ता का सबसे बड़ा धर्म है—सेवा, संवेदना और समावेश। यही वह आधार है जिस पर भाजपा ने छत्तीसगढ़ की शासन व्यवस्था का पुनर्निर्माण किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य की राजनीति अब सिर्फ बजट और वादों की घोषणा नहीं, बल्कि जमीनी न्याय, जनभागीदारी और जनसम्मान की यात्रा बन चुकी है। आदिवासी, दलित, पिछड़ा वर्ग, महिला, किसान, मजदूर, युवा, दिव्यांग और वंचित समुदाय — अब ये सभी सहायता के पात्र नहीं, बल्कि नीति और निर्णय के केंद्र हैं।

भाजपा शासन की सबसे बड़ी ताक़त यह रही है कि उसने कल्याणकारी योजनाओं को कागज़ से निकालकर ज़मीन तक पहुँचाया। “अंत्योदय से आत्मनिर्भरता” की नीति के तहत राज्य में ऐसी पारदर्शी, लक्षित और समावेशी व्यवस्थाएं बनाई गईं, जिनका लाभ हर वर्ग को बिना भेदभाव के मिला।

आदिवासी समाज के लिए विशेष ध्यान दिया गया। वनाधिकार पट्टे, पुश्तैनी ज़मीन की मान्यता, गौण वनोपज पर मालिकाना हक, और पुनर्वास नीति के ज़रिए उन्हें अधिकार भी मिले और सम्मान भी। साथ ही, एकलव्य आवासीय विद्यालय, गुरुकुल योजना, और आदिवासी छात्रवृत्ति ने शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्हें बराबरी की राह दिखाई।

दलित और पिछड़ा वर्ग के लिए आवास, शिक्षा, व्यवसाय, सुरक्षा और न्याय के क्षेत्र में योजनाओं को नई गति दी गई। डॉ. अंबेडकर छात्र आवास योजना, संघर्षशील पिछड़ा वर्ग उद्यम योजना, दलित सुरक्षा कानूनों का सख्त पालन, और विधिक सहायता शिविरों ने केवल राहत नहीं, हक और हौसले दिए।

महिलाओं को भाजपा शासन में केवल “कल्याण का विषय” नहीं, बल्कि निर्णय की धुरी बनाया गया। मातृ वंदना योजना, बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ, महिला स्वयं सहायता समूहों को स्वरोजगार, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को सम्मान और मानदेय वृद्धि, और महिला सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन व फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसी पहलों ने राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान का रास्ता दिखाया। अब छत्तीसगढ़ की नारी वोटर नहीं, विज़नरी बन रही है।

गरीब परिवारों को मुफ्त राशन, पक्का घर, निःशुल्क चिकित्सा सुविधा, और निर्बाध बिजली-पानी की सुविधा देकर भाजपा शासन ने जनकल्याण को केवल घोषणा नहीं, जीवन का यथार्थ बनाया। “मुख्यमंत्री जनकल्याण योजना”, जिसमें शादी अनुदान, बुजुर्ग पेंशन, मजदूर कल्याण, और दिव्यांग सहायता जैसे लाभ दिए जाते हैं, ने गरीबों को सम्मानजनक जीवन जीने की नई ताकत दी है।

श्रमिक और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए श्रम पहचान पोर्टल, निर्माण श्रमिक बीमा योजना, मुफ़्त बस यात्रा, स्वास्थ्य कार्ड, और दैनिक मजदूरी गारंटी योजना जैसे कदम ग़रीबी से बाहर निकलने का अवसर बनकर सामने आए हैं। अब मजदूर केवल हाथ का श्रमिक नहीं, शासन का भागीदार बन चुका है।

दिव्यांग जनों को भाजपा सरकार ने पहली बार विकलांगता को केवल मेडिकल स्थिति नहीं, सामाजिक अधिकार का मामला माना। दिव्यांग पेंशन, चलन-सहायक उपकरण वितरण, स्कूलों में विशेष शिक्षक, और नौकरी में आरक्षण ने उन्हें मुख्यधारा में आत्मगौरव के साथ जीने का अवसर दिया।

भाजपा शासन की सबसे बड़ी नीति विशेषता रही — हर लाभार्थी को सीधे उसके खाते में लाभ पहुँचाना, यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT)। इससे बिचौलियों, भ्रष्टाचार और भेदभाव की जगह अब समानता, सरलता और सुशासन ने ले ली है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं जनदर्शन कार्यक्रमों, जन चौपालों, वंचित वर्ग संवादों के ज़रिए यह सुनिश्चित करते हैं कि शासन आंकड़ों में नहीं, जनविश्वास में जिए। उन्होंने कहा है, “जब तक अंतिम पंक्ति का व्यक्ति मुस्कराएगा, तब तक शासन सफल माना जाएगा।”

भाजपा शासन में छत्तीसगढ़ केवल नीति और कार्यक्रमों से नहीं, न्याय और करुणा की भावना से संचालित हो रहा है। यह नया छत्तीसगढ़, जहाँ अंतिम जन भी प्राथमिकता में है, समावेशी विकास और सामाजिक न्याय का राष्ट्रीय मॉडल बनता जा रहा है — और यही है राजनीति का आदर्श और भाजपा की पहचान।

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